भारत और यूरोपीय: यूनियन के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील का औपचारिक ऐलान कर दिया गया है। 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों पक्षों ने वर्षों से चली आ रही बातचीत के सफल समापन की घोषणा की। इस समझौते को यूरोपीय यूनियन पहले ही ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार दे चुकी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कहा कि भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। यह समझौता न केवल आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करेगा।
लग्जरी कारों पर टैक्स में बड़ी कटौती
इस डील के तहत भारत में यूरोपीय लग्जरी कारों पर लगने वाला भारी-भरकम आयात शुल्क बड़ी मात्रा में घटाया जाएगा। फिलहाल BMW, मर्सिडीज, पॉर्श जैसी यूरोपीय प्रीमियम कारों पर करीब 110 प्रतिशत तक टैरिफ लगता है। समझौते के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से घटाकर पहले 40 प्रतिशत और आगे चलकर 10 प्रतिशत तक लाया जाएगा।
भारत ने हर साल 2.5 लाख यूरोपीय कारों के आयात का कोटा तय किया है, जिससे यूरोपीय वाहन कंपनियों के लिए भारतीय बाजार और अधिक सुलभ हो जाएगा।
यूरोपियन शराब और वाइन होंगी सस्ती
भारत-EU ट्रेड डील का सीधा असर शराब और वाइन की कीमतों पर भी पड़ेगा। अभी यूरोपीय देशों से आने वाली शराब पर लगभग 150 प्रतिशत टैरिफ लगता है। इसे घटाकर 20 से 30 प्रतिशत किए जाने पर सहमति बनी है।
बीयर पर शुल्क 110 प्रतिशत से घटकर 50 प्रतिशत होगा, जबकि स्पिरिट्स पर टैक्स करीब 40 प्रतिशत तक सीमित किया जाएगा। इससे भारतीय बाजार में यूरोपियन शराब और वाइन अपेक्षाकृत सस्ती हो जाएंगी।
कई सेक्टरों को मिलेगा बड़ा फायदा
समझौते के तहत भारत ने यूरोप से आने वाले कई उत्पादों पर टैक्स पूरी तरह खत्म या बहुत कम करने पर सहमति जताई है। इसमें रसायन, मशीनरी, मेडिकल और सर्जिकल उपकरण, विमान और अंतरिक्ष से जुड़े उत्पाद शामिल हैं। मेडिकल और सर्जिकल उपकरणों के करीब 90 प्रतिशत आयात पर अब टैक्स नहीं लगेगा।
जैतून का तेल, मार्जरीन और अन्य वनस्पति तेलों पर शून्य शुल्क लागू होगा। वहीं मशीनरी पर लगने वाला 44 प्रतिशत तक का टैक्स और रसायनों पर 22 प्रतिशत शुल्क भी लगभग समाप्त कर दिया जाएगा।
भारत को क्या होगा फायदा
इस समझौते से भारत के कपड़ा, लेदर और फुटवियर सेक्टर को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। यूरोपीय बाजार में भारतीय गारमेंट्स, जूते और लेदर उत्पादों पर लगने वाली करीब 10 प्रतिशत ड्यूटी कम या खत्म हो सकती है।
फार्मा और केमिकल सेक्टर में भारत का निर्यात 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, क्योंकि दवाओं की मंजूरी और नियमों को सरल बनाया जाएगा। इसके अलावा यूरोप के कार्बन टैक्स से भारतीय स्टील, एल्युमिनियम और हाइड्रोजन सेक्टर को राहत मिलने की संभावना है।
यूरोप को क्या मिलेगा फायदा
इस डील से यूरोपीय देशों को भारत जैसे विशाल बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने का मौका मिलेगा। यूरोप की आईटी, इंजीनियरिंग, टेलीकॉम और बिजनेस सर्विस कंपनियों के लिए भारत में निवेश और काम के नए रास्ते खुलेंगे। साथ ही यूरोपीय डिफेंस कंपनियां भारत में फैक्ट्रियां लगाने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।
EU लीडर्स का भारत दौरा
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भारत दौरे पर हैं। दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हैदराबाद हाउस में मुलाकात की और फ्री ट्रेड डील समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। राजघाट जाकर उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
यूरोपीय आयोग प्रमुख ने कहा कि भारत और यूरोप आज इतिहास रच रहे हैं और यह समझौता करीब दो अरब लोगों का विशाल मुक्त व्यापार बाजार तैयार करेगा।
निष्कर्ष:
भारत-यूरोपीय यूनियन फ्री ट्रेड डील को आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे जहां भारत में लग्जरी कारें और यूरोपियन शराब सस्ती होंगी, वहीं भारतीय उद्योगों को यूरोपीय बाजार में नई ताकत मिलेगी। यही वजह है कि इस समझौते को दुनिया भर में ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है।
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