गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में 114 साल पुराने बिसुही पुल के निर्माण की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब भावनात्मक और अनोखे विरोध के रूप में सामने आया है। राष्ट्रीय छात्र पंचायत के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को पुल के नीचे बैठकर अपने सिर मुंडवाए और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने बाल भेजने का ऐलान किया।
बिसुही पुल के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर पिछले 14 दिनों से धरना-प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह पुल 114 साल पुराना हो चुका है और आए दिन जाम व दुर्घटनाओं की वजह बन रहा है। बावजूद इसके प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इसी नाराजगी के चलते आज लगभग एक दर्जन कार्यकर्ताओं ने पुल के नीचे ही नाई को बुलाकर सामूहिक रूप से सिर मुंडवाया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह कदम उन्होंने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए उठाया है।
राष्ट्रीय छात्र पंचायत के गोंडा जिला उपाध्यक्ष युगांक मिश्रा ने कहा कि हजारों की संख्या में मुख्यमंत्री को पत्र भेजे जा चुके हैं और 12,000 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर कर इस मांग का समर्थन किया है।
उन्होंने कहा,
“आज हमने अपने सिर के बाल मुंडवाकर मुख्यमंत्री को अर्पित करने का निर्णय लिया है। हमें उम्मीद है कि हमारे ये बाल देखकर ही सही, वे हमारी पीड़ा समझेंगे और पुल निर्माण का रास्ता साफ करेंगे।”
मोहनपुर निवासी भूपेन तिवारी ने बताया कि वे प्रतिदिन इसी पुल से होकर अपनी निजी कंपनी में नौकरी के लिए जाते हैं। पुल की जर्जर स्थिति और जाम के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे कई बार उनकी सैलरी भी कट चुकी है।
उन्होंने भी छात्र पंचायत के समर्थन में सिर मुंडवाया और प्रशासन से जल्द पुल निर्माण की मांग की। उनका कहना है कि यह सिर्फ छात्रों का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता की समस्या है।
प्रदर्शन में अभिषेक वर्मा, आदित्य द्विवेदी, हिमांशु मिश्रा, सरताज, शहजादा, शुभम और अमन शर्मा सहित कई अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिसुही पुल क्षेत्र की जीवनरेखा है। भारी वाहनों के दबाव और वर्षों की अनदेखी के कारण यह पुल अब अपनी क्षमता से अधिक बोझ झेल रहा है।
गोंडा में 114 साल पुराने बिसुही पुल को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब प्रतीकात्मक और भावनात्मक विरोध में बदल चुका है। सिर मुंडवाकर मुख्यमंत्री को बाल भेजने का फैसला प्रशासन के लिए एक सीधा संदेश है कि जनता अब इंतजार से थक चुकी है। अब देखना होगा कि सरकार इस अनोखे ‘बाल आंदोलन’ पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या जल्द पुल निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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