नई दिल्ली: में आयोजित अंतरराष्ट्रीय AI समिट 2026 के दौरान हुए हंगामे ने देश की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। दिल्ली के भारत मंडपम में हुए इस घटनाक्रम पर अब सियासी दल आमने-सामने आ गए हैं।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने कांग्रेस के प्रदर्शन को “गलत” और “निंदनीय” करार दिया है।
अखिलेश यादव ने कहा कि जब दुनियाभर से डेलीगेट्स आए हों, तब इस तरह का हंगामा नहीं होना चाहिए। सरकार से राजनीतिक लड़ाई अलग बात है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसा व्यवहार देश की छवि को नुकसान पहुंचाता है।
मायावती ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय स्तर का था और ऐसे मौके पर अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन करना देश की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने इसे “अति-अशोभनीय” बताया।
20 फरवरी को आयोजित AI समिट के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहन रखी थी, जिस पर “PM is Compromised” लिखा था।
बताया जा रहा है कि कार्यकर्ता ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए समिट हॉल में दाखिल हुए और अचानक जैकेट उतारकर विरोध शुरू कर दिया। दिल्ली पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने चारों को 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस का दावा है कि यह प्रदर्शन एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है और फंडिंग एंगल की भी जांच की जा रही है।
सरकारी वकील ने अदालत में कहा कि आरोपियों ने देश विरोधी नारे लगाए और पुलिसकर्मियों से झड़प की। वहीं बचाव पक्ष का कहना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।
कांग्रेस के विरोध में भाजपा ने दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शन किया।
मुंबई के मुलुंड में भाजपा कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के काफिले को काले झंडे दिखाए।
मध्य प्रदेश के इंदौर में भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हुई, जिसमें पत्थरबाजी की खबर सामने आई। पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए बल तैनात किया।
भाजपा सांसदों और नेताओं ने इसे “राष्ट्र के साथ द्रोह” जैसा कदम बताया। पार्टी का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि खराब करने की साजिश रची गई।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अन्य नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और कहा कि यह पार्टी की “हताशा” को दर्शाता है।
AI समिट में हुआ यह हंगामा अब केवल एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है। विपक्ष के अंदर भी इस पर मतभेद दिख रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक विरोध बता रही है, वहीं अन्य विपक्षी दल इसे गलत समय और गलत मंच पर किया गया कदम मान रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक गरमा सकता है।
AI समिट 2026 में हुआ यह विवाद अब राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शन को लेकर सियासत तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस इसे अपने अधिकार का इस्तेमाल बता रही है, वहीं मायावती और अखिलेश जैसे विपक्षी नेता भी इसे अनुचित बता रहे हैं।
अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट और अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं — क्या यह सिर्फ विरोध था या वाकई कोई बड़ी साजिश? आने वाले दिन इस सियासी घमासान की दिशा तय करेंगे।
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