राजस्थान: में नगर निकाय सीमा से गुजरने वाले राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर बनी शराब की दुकानों को लेकर बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें हाईवे से 500 मीटर की परिधि में स्थित शराब की दुकानों को हटाने और स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए थे। इस फैसले से प्रदेश की करीब 1102 शराब की दुकानें फिलहाल बंद नहीं होंगी।
यह अंतरिम आदेश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राज्य सरकार और अन्य लाइसेंसधारकों की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक हाईकोर्ट के आदेश के अमल पर रोक लगा दी है।
राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने अदालत में दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही अपने विभिन्न फैसलों में नगर निकाय सीमा के भीतर स्थित क्षेत्रों को 500 मीटर की बाध्यता से राहत दे चुका है। ऐसे में हाईकोर्ट द्वारा सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित कानूनी सिद्धांतों को नजरअंदाज करते हुए आदेश पारित करना न्यायसंगत नहीं है।
गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्यपीठ, जोधपुर ने 24 नवंबर 2025 को आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से 500 मीटर की दूरी के भीतर स्थित सभी शराब की दुकानों की पहचान कर उन्हें हटाए या स्थानांतरित करे। यह निर्देश नगर निगम, स्थानीय स्वशासी निकायों और वैधानिक विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों पर भी लागू किया गया था।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि नगर सीमाओं का विस्तार सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए सड़क सुरक्षा मानकों को कमजोर करने का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही थी।
हालांकि, राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया था कि यदि इन दुकानों को बंद या स्थानांतरित किया जाता है, तो इससे सरकार को करीब 2100 करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों की जान और सार्वजनिक सुरक्षा, वित्तीय नुकसान की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है।
अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाई गई अंतरिम रोक के बाद राज्य सरकार और शराब लाइसेंसधारकों को बड़ी राहत मिली है। फिलहाल, जब तक मामले की अंतिम सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक हाईवे किनारे स्थित ये दुकानें संचालित होती रहेंगी।
राजस्थान में हाईवे से जुड़ी शराब दुकानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राज्य सरकार के लिए तत्काल राहत लेकर आया है। 2100 करोड़ रुपए के संभावित नुकसान से फिलहाल बचाव हुआ है, लेकिन अंतिम निर्णय आने तक यह मामला कानूनी बहस का विषय बना रहेगा। आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला राज्य की आबकारी नीति और सड़क सुरक्षा दोनों पर दूरगामी असर डाल सकता है।
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