उत्तर प्रदेश: के मथुरा जिले में स्थित Barsana की रंगीली गलियां बुधवार को एक बार फिर इतिहास और आस्था के रंग में सराबोर हो गईं। विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली की शुरुआत होते ही पूरा क्षेत्र “राधे-राधे” के जयकारों, ढोल-नगाड़ों की गूंज और अबीर-गुलाल की उड़ती बौछारों से भर उठा।
सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। प्रशासन के अनुसार करीब 20 लाख श्रद्धालु बरसाना पहुंचे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। सुरक्षा के लिए 4500 से अधिक पुलिसकर्मी, पीएसी और एंटी रोमियो टीम तैनात की गई है।
लट्ठमार होली की शुरुआत से पहले सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मियों के साथ सखियों ने पारंपरिक अंदाज में लट्ठमार की। यह दृश्य देखने के लिए श्रद्धालु उत्साहित नजर आए।
महिलाएं हंसी-ठिठोली और गीतों के बीच लाठियां चलाती रहीं, जबकि सामने खड़े पुलिसकर्मी और स्थानीय पुरुष ढाल से खुद को बचाते दिखे। यह सब प्रेम और परंपरा का हिस्सा है, जिसे देखने के लिए देश-दुनिया से लोग आते हैं।
बरसाना की पीली पोखर पर नंदगांव से आने वाले हुरियारों के स्वागत के लिए 2000 किलो ठंडाई तैयार की गई। जगह-जगह सादी ठंडाई, भांग की ठंडाई, पकौड़े और मीठी बूंदी की व्यवस्था की गई।
हुरियारों का स्वागत फूल-मालाओं और गुलाल से किया गया। युवाओं ने रंग-बिरंगी पगड़ी और चश्मे पहनकर होली के गीत गाए और ढोल की थाप पर जमकर नृत्य किया।
बरसाना राधा रानी का जन्मस्थान माना जाता है। वहीं नंदगांव भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा स्थान है। दोनों स्थानों के बीच लगभग 8 किलोमीटर की दूरी है।
परंपरा के अनुसार, नंदगांव के हुरियारे बरसाना आते हैं और सखियां लाठियों से उनका स्वागत करती हैं। हुरियारे ढाल लेकर आते हैं और लट्ठों से बचते हुए प्रेम की होली खेलते हैं।
यह अनोखी परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे देखने के लिए हर साल लाखों लोग Mathura और वृंदावन पहुंचते हैं।
लट्ठमार होली से एक दिन पहले बरसाना के प्रसिद्ध Radha Rani Temple (लाड़लीजी मंदिर) में लड्डूमार होली खेली गई।
महंतों ने मंदिर की छत से श्रद्धालुओं पर लड्डू बरसाए। भक्तों ने प्रसाद के रूप में लड्डू लूटे और जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा।
नंदगांव से आए मुख्य पुजारी मनीष गोस्वामी ने बताया कि जो ध्वजा हुरियारे लेकर आते हैं, वह स्वयं कृष्ण-बलराम का स्वरूप मानी जाती है।
ध्वजा का इत्र और गुलाल से पूजन किया जाता है। इसके बाद इसे श्रीजी मंदिर ले जाया जाता है, जहां राधारानी के चरणों से स्पर्श कराया जाता है। समाज गायन के बाद रंगीली गली में लट्ठमार होली की शुरुआत होती है।
रंगीली गली में कदम रखते ही हर तरफ रंगों का बादल दिखाई देता है। ढोल, मंजीरा और नगाड़ों की आवाज के बीच “घूंघट खोल दिखाए दे…” जैसे पारंपरिक फाग गीत गूंजते रहे।
नंदगांव से आए हुरियारे विजय गोस्वामी ने बताया कि वे बचपन से यह परंपरा निभा रहे हैं और अब अपने बेटे को भी साथ लाए हैं।
उनके अनुसार, “यह प्रेम की होली है। सखियां हमें लाठियां मारती हैं और हम इसे आशीर्वाद की तरह स्वीकार करते हैं।”
इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। डीएम और एसएसपी लगातार गलियों में भ्रमण कर रहे हैं। ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है।
मंदिर जाने वाले रास्तों पर बैरियर लगाए गए हैं। कुछ समय के लिए मंदिर को साफ-सफाई के लिए बंद भी किया गया, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बरसाना की लट्ठमार होली अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुकी है। अमेरिका, फ्रांस, जापान और ऑस्ट्रेलिया से आए पर्यटक इस अनोखी परंपरा को अपने कैमरों में कैद करते दिखे।
कई विदेशी पर्यटक पारंपरिक भारतीय पोशाक पहनकर होली खेलते नजर आए।
20 लाख से अधिक लोगों की भीड़ को संभालना किसी भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। लेकिन आस्था और अनुशासन का अनूठा संगम यहां देखने को मिला।
लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हुए “राधे-राधे” कहते रहे। हर तरफ खुशी, उल्लास और भाईचारे का माहौल नजर आया।
बरसाना की लट्ठमार होली सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के पर्यटन का बड़ा आकर्षण बन चुकी है। स्थानीय व्यापारियों के लिए यह सीजन आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।
होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाएं कई दिन पहले ही फुल हो गईं। स्थानीय मिठाई दुकानों और हस्तशिल्प बाजारों में भी जबरदस्त रौनक देखी गई।
बरसाना की लट्ठमार होली प्रेम, परंपरा और उल्लास का अनूठा संगम है। यहां लट्ठ भी चलते हैं और गीत भी गूंजते हैं, लेकिन हर वार में छिपा होता है स्नेह और भक्ति का भाव।
20 लाख श्रद्धालुओं की मौजूदगी, 2000 किलो ठंडाई, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और रंगीली गलियों की मस्ती—इन सबने मिलकर इस वर्ष की लट्ठमार होली को और भी भव्य बना दिया।
बरसाना एक बार फिर साबित कर गया कि यहां होली सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि जीवंत परंपरा है जो सदियों से लोगों को जोड़ती आई है।
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