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जयपुर की सड़कों पर दौड़ी पहली गुलाबी इलेक्ट्रिक बस: GPS, CCTV और पैनिक बटन से लैस… जून तक आएंगी 300+ ई-बसें, बदलेगी शहर की तस्वीर

जयपुर: अब सड़कों पर दिखेगा ‘गुलाबी ग्रीन ट्रांसपोर्ट’ का नया दौर

Jaipur: की पहचान अब केवल ‘पिंक सिटी’ तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जल्द ही यह ‘ग्रीन सिटी’ के रूप में भी जानी जाएगी। गुरुवार को शहर की सड़कों पर पहली गुलाबी इलेक्ट्रिक बस दौड़ती नजर आई। यह बस आधुनिक तकनीक और सुरक्षा फीचर्स से लैस है।

Jaipur City Transport Services Limited (JCTSL) ने 3 दिवसीय ट्रायल रन की शुरुआत की है। इस ट्रायल में 9 मीटर और 12 मीटर लंबाई की आधुनिक ई-बसों की तकनीकी क्षमता, बैटरी परफॉर्मेंस, लोड क्षमता और संचालन की व्यवहारिक स्थिति की जांच की जा रही है।

यदि ट्रायल सफल रहता है, तो जून 2026 तक 300 से अधिक नई इलेक्ट्रिक बसें जयपुर की सिटी ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकती हैं।


अग्रवाल फार्म से हुई शुरुआत

गुरुवार सुबह करीब 11 बजे अग्रवाल फार्म से पहली ई-बस को ट्रायल रन के लिए रवाना किया गया। बस को शहर के विभिन्न प्रमुख रूटों पर चलाकर उसकी चार्जिंग क्षमता, बैटरी बैकअप और ट्रैफिक कंडीशन में प्रदर्शन का परीक्षण किया जा रहा है।

ट्रायल के दौरान यात्रियों की जगह बस में पानी से भरे ड्रम रखे गए, ताकि वास्तविक लोड कंडीशन का आकलन किया जा सके। इससे बस की संतुलन क्षमता और ऊर्जा खपत की सटीक जांच संभव हो सके।


जून तक 300 से ज्यादा बसें

JCTSL के प्रबंध निदेशक नारायण सिंह के अनुसार, केंद्र सरकार की ई-बस सेवा योजना के तहत राजस्थान को कुल 1150 इलेक्ट्रिक बसें मिलनी हैं। पहले चरण में 675 बसें आवंटित की गई हैं।

जयपुर को पहले चरण में 150 बसें मिलेंगी। इसके बाद 168 और फिर 150 अतिरिक्त बसें शामिल की जाएंगी। यानी कुल मिलाकर जून तक 300 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतर सकती हैं।


दो डिपो होंगे संचालन के केंद्र

शहर के बगराना और टोडी डिपो को इन ई-बसों के संचालन के लिए तैयार किया गया है। शुरुआती चरण में दोनों डिपो को 75-75 बसें दी जाएंगी।

चार्जिंग स्टेशन, मेंटेनेंस यूनिट और तकनीकी टीम की तैनाती पहले से की जा रही है। ट्रायल के दौरान तैयार होने वाली तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर नियमित संचालन की तारीख तय की जाएगी।


सुरक्षा और सुविधा का हाईटेक पैकेज

नई इलेक्ट्रिक बसों में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता दी गई है। इनमें शामिल हैं:

  • GPS ट्रैकिंग सिस्टम

  • CCTV कैमरे

  • पैनिक बटन

  • ऑटोमेटिक दरवाजे

  • दिव्यांगजनों के लिए विशेष रैंप

  • आरामदायक और लो-नॉइज़ केबिन

इन फीचर्स से यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा। खासकर महिला यात्रियों के लिए पैनिक बटन और CCTV बड़ी राहत साबित होंगे।


प्रदूषण पर बड़ा असर

जयपुर में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से:

  • डीजल की खपत कम होगी

  • कार्बन उत्सर्जन घटेगा

  • ध्वनि प्रदूषण कम होगा

  • ईंधन खर्च में बचत होगी

पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसें काफी कम शोर करती हैं। इससे शहर के व्यस्त इलाकों में ध्वनि प्रदूषण में भी कमी आएगी।


स्मार्ट सिटी की दिशा में कदम

जयपुर पहले से ही स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कई आधुनिक परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इलेक्ट्रिक बसों का संचालन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहा, तो जयपुर देश के उन शहरों में शामिल हो जाएगा जहां सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह हरित ऊर्जा की ओर अग्रसर है।


ट्रायल रन में जुटे शहरवासी

गुलाबी रंग की आधुनिक बस को देखने के लिए बड़ी संख्या में शहरवासी भी मौके पर पहुंचे। सोशल मीडिया पर भी ई-बस की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। लोगों ने इसे “भविष्य की बस” और “ग्रीन जयपुर की शुरुआत” बताया।


तकनीकी परीक्षण क्यों जरूरी?

इलेक्ट्रिक बसों का संचालन पारंपरिक बसों से अलग होता है। इसलिए ट्रायल रन में इन बिंदुओं की जांच की जा रही है:

  1. बैटरी चार्जिंग टाइम

  2. एक बार चार्ज में दूरी

  3. ट्रैफिक में परफॉर्मेंस

  4. ब्रेकिंग सिस्टम

  5. इमरजेंसी रिस्पॉन्स

यदि सभी मानक संतोषजनक पाए जाते हैं, तभी नियमित संचालन की अनुमति दी जाएगी।


रोजगार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

इलेक्ट्रिक बसों के आने से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। चार्जिंग स्टेशन, मेंटेनेंस स्टाफ और तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत बढ़ेगी।

इसके अलावा डीजल पर निर्भरता कम होने से लंबी अवधि में सरकारी खर्च में भी कमी आएगी।


क्या होंगी चुनौतियां?

हालांकि यह पहल सकारात्मक है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं:

  • पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

  • बैटरी मेंटेनेंस लागत

  • बिजली आपूर्ति की निरंतरता

  • ड्राइवरों का विशेष प्रशिक्षण

प्रशासन का दावा है कि इन सभी पहलुओं पर पहले से तैयारी की जा चुकी है।


निष्कर्ष

जयपुर में गुलाबी इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत केवल एक ट्रायल नहीं, बल्कि शहर के भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो जून तक सड़कों पर 300 से ज्यादा ई-बसें दौड़ती नजर आएंगी और जयपुर का सार्वजनिक परिवहन प्रदूषण मुक्त, आधुनिक और सुरक्षित बनेगा।

यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव भी देगी। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ग्रीन ट्रांसपोर्ट मॉडल किस तरह शहर की तस्वीर बदलता है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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