Download App Now Register Now

“कर्म कोई करे, भोगे कोई और?” — Alwar जिला परिषद में खेल सामग्री खरीद घोटाले का साया, करोड़ों की फाइलों में किसने किया खेल!

राजस्थान: के Alwar जिले में जिला परिषद के अंतर्गत खेल सामग्री की खरीद को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। करोड़ों रुपये की इस खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि सीमित वित्तीय अधिकारों के बावजूद नियमों की अनदेखी कर स्वीकृतियां जारी की गईं और तकनीकी प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया।

मामला अब उच्च स्तर तक पहुँच चुका है और मुख्य सचिव स्तर पर शिकायत दर्ज होने की चर्चा है। लेकिन अभी तक किसी ठोस कार्रवाई का सार्वजनिक रूप से सामने न आना कई सवाल खड़े कर रहा है।


क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार, जिला परिषद को खेल सामग्री खरीद के लिए एक निश्चित वित्तीय सीमा तक ही स्वीकृति देने का अधिकार होता है। आरोप है कि इस सीमा से अधिक राशि की खरीद के लिए तथ्यों को छिपाकर या आंशिक जानकारी देकर उच्च स्तर से मंजूरी ली गई।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और न तो पर्याप्त निविदा प्रक्रिया अपनाई गई, न ही उचित तकनीकी जांच कराई गई।

सबसे बड़ा सवाल तकनीकी स्वीकृति को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि खेल सामग्री की तकनीकी जांच खेल विभाग के अधिकृत अधिकारियों से करवाने के बजाय सिविल तकनीकी अधिकारियों से स्वीकृति ली गई। नियमों के अनुसार, खेल सामग्री की गुणवत्ता और उपयोगिता का परीक्षण खेल विशेषज्ञों द्वारा किया जाना चाहिए।


तकनीकी स्वीकृति पर विवाद

खेल सामग्री की खरीद में तकनीकी स्वीकृति अत्यंत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इससे सामग्री की गुणवत्ता, मानक और उपयोगिता सुनिश्चित होती है।

आरोप है कि यहां तकनीकी स्वीकृति देने की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सिविल तकनीकी अधिकारियों का खेल उपकरणों के तकनीकी मानकों से सीधा संबंध नहीं होता, फिर भी उनसे अनुमोदन लिया गया।

यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह स्पष्ट रूप से वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन माना जाएगा।


वित्तीय अनियमितताओं और जीएसटी पर सवाल

मामले में जीएसटी से संबंधित अनियमितताओं के भी आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि कुछ बिलों में जीएसटी दरों में विसंगतियां हैं और कर भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही।

वित्तीय प्रक्रियाओं में अनियमितता का मतलब केवल नियमों का उल्लंघन ही नहीं बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका भी है।

शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि भुगतान प्रक्रिया में जल्दबाजी दिखाई गई और फाइलों को रिकॉर्ड समय में क्लियर किया गया।


प्रशासन की भूमिका पर उठते सवाल

इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा प्रशासनिक भूमिका को लेकर हो रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिन अधिकारियों पर जांच की आंच आनी चाहिए थी, उन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है।

अब तक न तो किसी अधिकारी का निलंबन हुआ है और न ही सार्वजनिक रूप से किसी जांच समिति की घोषणा की गई है।

यदि शिकायत मुख्य सचिव स्तर तक पहुंच चुकी है, तो यह सवाल उठता है कि अब तक कोई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट क्यों सामने नहीं आई?


राजनीतिक आयाम: विधायक का नाम चर्चा में

इस मामले में Baljeet Yadav का नाम भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विधायक मद से राशि उपलब्ध कराई गई थी।

विधायक समर्थकों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना था और खरीद प्रक्रिया जिला परिषद की जिम्मेदारी थी।

दूसरी ओर, कुछ राजनीतिक विरोधी इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं। आरोप है कि कथित अनियमितताओं के जरिए विधायक को घेरने की रणनीति बनाई जा रही है।


शिकायत मुख्य सचिव स्तर तक

सूत्रों के अनुसार, शिकायत राज्य के मुख्य सचिव स्तर तक पहुंच चुकी है और दोषियों के खिलाफ विभागीय तथा आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है।

यदि शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जांच बैठती है तो यह मामला राज्य स्तर पर बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वित्तीय अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निलंबन, चार्जशीट और आपराधिक मुकदमा दर्ज हो सकता है।


पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल

सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। खेल सामग्री जैसी योजनाएं सीधे युवाओं और खिलाड़ियों से जुड़ी होती हैं।

यदि इन योजनाओं में गड़बड़ी होती है तो इसका सीधा असर खिलाड़ियों के भविष्य पर पड़ता है।

इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या स्थानीय निकायों में वित्तीय अनुशासन की निगरानी के लिए पर्याप्त तंत्र मौजूद है?


विशेषज्ञों की राय

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सरकारी खरीद में तीन स्तर की जांच आवश्यक होती है—

  1. प्रशासनिक स्वीकृति

  2. तकनीकी स्वीकृति

  3. वित्तीय अनुमोदन

यदि इनमें से किसी एक स्तर पर भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता तो पूरी खरीद प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ जाती है।


आगे क्या?

अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। क्या उच्च स्तरीय जांच समिति गठित होगी? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?

या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

जनता और खिलाड़ियों को इस बात का इंतजार है कि सच्चाई सामने आए और यदि कोई दोषी है तो उसे दंड मिले।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

Related News

All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.

BREAKING NEWS
बीकानेर बनेगा निशानेबाजी का नया हब! सादुल क्लब में अंतरराष्ट्रीय शूटिंग रेंज की तैयारी, ओलंपिक स्तर की 17 मशीनें लगेंगी | हनुमानगढ़ में भीषण सड़क हादसा: स्लीपर कोच बस और टेंपो की आमने-सामने टक्कर, चालक की मौके पर मौत | कोटा में सरपंच-पंच चुनाव: 162 ग्राम पंचायतों में मतदान जारी, 1128 प्रत्याशी मैदान में; 80 साल की सूरजा बाई व्हीलचेयर पर पहुंचीं | जोधपुर की 6 पंचायत समितियों में सरपंच-पंच चुनाव के लिए मतदान जारी, 101 साल की दाखू कंवर ने भी डाला वोट | जयपुर की 212 ग्राम पंचायतों में सरपंच-पंच चुनाव के लिए मतदान जारी, देर रात तक आएंगे नतीजे | सीकर में ईदगाह चौराहे से जैन भवन तक वन-वे व्यवस्था लागू, गलत दिशा में जाने पर पंचर होगा टायर | जयपुर पंचायत चुनाव: सुबह 10 बजे तक 14.70% मतदान, 22 जिला परिषद और 146 पंचायत समिति वार्डों में वोटिंग | राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: सुबह 10 बजे तक बीकानेर में 14.78% मतदान, कई जगह EVM में खराबी | टेलीकॉम सेक्टर में नई तकनीकों की टेस्टिंग होगी आसान, सरकार ने जारी किए नए नियम | पंचायत चुनाव के पहले चरण में EVM में खराबी, जयपुर के कालवाड़ में 45 मिनट रुका मतदान |