मिडिल ईस्ट: में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। शनिवार सुबह भारतीय समय के मुताबिक ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में जोरदार धमाके सुने गए। आसमान में धुएं के गुबार और हवाई हमलों के सायरन की आवाजों ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। यह हमला इजराइल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई का हिस्सा बताया जा रहा है।
इजराइल ने इस ऑपरेशन को ‘लायंस रोअर’ (Lion’s Roar) नाम दिया है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में इसे ‘मागेन येहुदा’ (यहूदा की ढाल) भी कहा गया है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया कि यह एक जॉइंट मिलिट्री एक्शन है।
ईरान ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल की ओर करीब 400 मिसाइलें दागने का दावा किया है। इसके बाद इजराइल के उत्तरी और मध्य हिस्सों में सायरन बज उठे और एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हो गया।
प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, हमले में ईरान के कई संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें खुफिया मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, ईरान का परमाणु ऊर्जा संगठन और सुप्रीम लीडर के कार्यालय के पास के इलाके शामिल हैं।
हमले के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया। सरकारी मीडिया ने कहा कि वे सुरक्षित हैं और देश की सैन्य प्रतिक्रिया की निगरानी कर रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है।
ट्रम्प ने कहा,
“हमारा उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों और हमारे सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ईरान की मिसाइल क्षमता को समाप्त करना जरूरी है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान ने परमाणु कार्यक्रम छोड़ने का अवसर गंवा दिया है और अब इंतजार संभव नहीं।
ट्रम्प ने यह भी स्वीकार किया कि इस संघर्ष में अमेरिकी सैनिकों की जान भी जा सकती है, लेकिन इसे भविष्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने पहले वीडियो संदेश में तेहरान में शासन परिवर्तन की बात कही।
उन्होंने ईरान की जनता से अपील की—
“यह समय है जब आप जुल्म के बोझ को हटाकर स्वतंत्र और शांतिपूर्ण ईरान बनाएं।”
नेतन्याहू ने कहा कि ईरान की मौजूदा सरकार को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि यह पूरी दुनिया के लिए खतरा है।
इजराइली सेना के अनुसार, ईरान से दागी गई मिसाइलों को देश की ओर आते हुए देखा गया। इजराइल के एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने का दावा किया है।
ईरान की सरकारी एजेंसियों ने कहा कि यह “आक्रामकता का जवाब” है और युद्ध की शुरुआत इजराइल-अमेरिका ने की है, लेकिन अंत ईरान करेगा।
हमले के बाद ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया और सभी उड़ानें रोक दीं। इंटरनेट मॉनिटरिंग एजेंसी नेटब्लॉक्स के मुताबिक, देश में इंटरनेट कनेक्टिविटी लगभग 54% तक गिर गई है।
इजराइल ने भी सुरक्षा कारणों से अपना हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।
अमेरिका ने हमले से पहले अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड क्षेत्र में तैनात किया था।
इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। कई गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और F-22, F-35 जैसे आधुनिक फाइटर जेट भी भेजे गए हैं।
यह पूरा संघर्ष ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट को लेकर बढ़ा है।
2015 में हुआ संयुक्त व्यापक कार्य योजना समझौता, यानी Joint Comprehensive Plan of Action, ईरान और विश्व शक्तियों के बीच हुआ था।
ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल में अमेरिका को इस समझौते से बाहर कर लिया था। इसके बाद से तनाव लगातार बढ़ता गया।
अमेरिका ने हालिया वार्ता में चार शर्तें रखीं—
यूरेनियम एनरिचमेंट पर पूर्ण प्रतिबंध
संवर्धित यूरेनियम हटाना
लंबी दूरी की मिसाइलों की संख्या सीमित करना
क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को समर्थन बंद करना
ईरान ने इन शर्तों को अपनी “रेड लाइन” बताया।
इस सैन्य कार्रवाई के बाद बहरीन और कतर में अमेरिकी दूतावासों ने अपने कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की मौजूदगी पहले से ही मजबूत थी। अब इस टकराव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा चला तो तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक बाजारों में गिरावट और क्षेत्रीय युद्ध की आशंका बढ़ सकती है।
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने कहा कि यह कार्रवाई ईरान की जनता के खिलाफ नहीं, बल्कि इस्लामिक शासन के खिलाफ है।
उन्होंने दावा किया कि “अंतिम जीत जनता की होगी” और लोगों से सतर्क रहने की अपील की।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह संघर्ष तीन दिशाओं में जा सकता है:
सीमित हवाई हमले और कूटनीतिक समाधान
लंबा क्षेत्रीय युद्ध
शासन परिवर्तन की कोशिश
हालांकि फिलहाल दोनों पक्ष आक्रामक रुख में हैं और तनाव चरम पर है।
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किया गया संयुक्त हमला मिडिल ईस्ट में एक बड़े युद्ध की शुरुआत का संकेत हो सकता है। 400 मिसाइलों के पलटवार और शीर्ष नेतृत्व के सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट होने से साफ है कि यह टकराव गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है।
अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति आखिरी वक्त पर इस आग को बुझा पाएगी या मिडिल ईस्ट एक और विनाशकारी युद्ध की ओर बढ़ रहा है।
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