राजस्थान: की राजधानी जयपुर में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का एक बड़ा मामला सामने आया है। टोंक रोड स्थित नगर निगम ग्रेटर मुख्यालय के पीछे करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर भूमाफियाओं द्वारा कब्जा और तेजी से निर्माण कार्य किए जाने के आरोप लगे हैं। इस मामले में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के अधिकारियों पर भी मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
मामला जेडीए के जोन संख्या–3 क्षेत्र का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार ग्राम भोजपुरा, तहसील जयपुर के खसरा नंबर 228 की यह जमीन पहले ही लालकोठी/विधानसभा योजना के तहत अधिग्रहित की जा चुकी है। सूत्रों के मुताबिक अधिग्रहण के बाद इस जमीन के काश्तकारों को मुआवजे के रूप में दूसरी जमीन भी आवंटित की जा चुकी थी।
बताया जा रहा है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद कुछ भूमाफियाओं ने इस जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया और यहां निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पिछले कुछ महीनों से यहां तेजी से निर्माण गतिविधियां चल रही हैं।
इस मामले में कई बार जेडीए अधिकारियों को शिकायत भी दी गई, लेकिन आरोप है कि अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जेडीए के जोन उपायुक्त–3 और संबंधित कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण ही भूमाफिया खुलेआम सरकारी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं ने अपने आरोपों के समर्थन में तकनीकी साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं। उनके अनुसार सितंबर 2025 की गूगल अर्थ की तस्वीरों में इस जमीन पर किसी प्रकार का निर्माण दिखाई नहीं देता।
लेकिन जनवरी 2026 में जब शिकायत दर्ज कराई गई, तब उसी स्थान पर तेजी से निर्माण होता हुआ देखा गया। इससे यह संकेत मिलता है कि पिछले कुछ महीनों में जमीन पर अवैध गतिविधियां शुरू हुई हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जेडीए एक्ट की धारा 72 के तहत अवैध कब्जे और निर्माण के खिलाफ नोटिस जारी कर कार्रवाई की जानी चाहिए थी। लेकिन अब तक जेडीए की ओर से इस मामले में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
उनका आरोप है कि यदि समय रहते कार्रवाई की जाती तो सरकारी जमीन पर इस तरह का निर्माण नहीं हो पाता। इसके कारण अब सरकारी संपत्ति को बड़ा नुकसान होने की आशंका है।
इस जमीन से जुड़ा एक पुराना मामला भी सामने आया है। बताया गया है कि जेडीए सचिव द्वारा लोकायुक्त को भेजे गए एक पत्र में इस भूमि से संबंधित एक पुराने विवाद का जिक्र किया गया था।
पत्र के अनुसार 6 दिसंबर 1996 को मीना गृह निर्माण सहकारी समिति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। यह मामला भी इसी जमीन से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि इसके बावजूद जमीन पर विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि जेडीए के कुछ अधिकारी और कर्मचारी भूमाफियाओं से कथित तौर पर लाखों रुपये की रिश्वत लेकर सरकारी जमीन पर कब्जा कराने में मदद कर रहे हैं।
उनका कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। साथ ही कई अधिकारी और कर्मचारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं ने राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि करीब 100 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन से जुड़ा यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की है कि अवैध कब्जे को तुरंत हटाया जाए और यदि किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए।
जयपुर के टोंक रोड स्थित 100 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि शिकायतकर्ताओं के आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल सरकारी संपत्ति की सुरक्षा बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए भी एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद इस मामले में क्या कार्रवाई होती है।
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