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मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को बताया ट्रंप का गुलाम, एपस्टीन फाइल का जिक्र कर सरकार को घेरा

कांग्रेस: अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump को लेकर बेहद तीखा बयान दिया है।

कर्नाटक के Kalaburagi में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान खरगे ने आरोप लगाया कि भारत की विदेश नीति और व्यापार नीति अब अमेरिका के दबाव में चल रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति देश और खासकर किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।

खरगे ने अपने भाषण में कहा कि अमेरिका का रवैया कई मामलों में अहंकारी है और वह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के दबाव में फैसले ले रहे हैं और देश के हितों की पर्याप्त रक्षा नहीं कर पा रहे हैं।


ट्रंप को बताया तानाशाह, मोदी पर निशाना

अपने संबोधन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रवैया तानाशाही जैसा है।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका का प्रभाव इतना ज्यादा है कि कई देश उसके दबाव में निर्णय लेने को मजबूर हो जाते हैं।

खरगे ने आरोप लगाया कि भारत भी अब उसी दबाव में आकर नीतियां बना रहा है। उन्होंने कहा कि इससे देश की स्वतंत्र विदेश नीति पर असर पड़ सकता है।


पश्चिम एशिया की स्थिति पर जताई चिंता

अपने भाषण में खरगे ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के शीर्ष नेता को निशाना बनाना वैश्विक शांति के लिए खतरनाक हो सकता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei जैसे नेताओं को निशाना बनाया जाता है तो इससे अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

खरगे ने कहा कि ऐसी घटनाएं दुनिया में अस्थिरता और संघर्ष को बढ़ावा दे सकती हैं।


भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर उठाए सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौतों पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि भारत को कई मामलों में मजबूरी में अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करना पड़ा है।

खरगे के मुताबिक भारत अपने कई कृषि उत्पादों पर टैरिफ नहीं लगा सकता, जबकि अमेरिका भारतीय निर्यात पर टैरिफ लगाता है।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति भारतीय किसानों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

खरगे ने यह भी कहा कि भारत में करीब 65 प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर हैं, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा लगभग 3 प्रतिशत है। ऐसे में अगर अमेरिकी कृषि उत्पाद बड़े पैमाने पर भारतीय बाजार में आते हैं तो इससे स्थानीय किसानों की आय प्रभावित हो सकती है।


तेल खरीद नीति पर भी उठाए सवाल

खरगे ने यह भी आरोप लगाया कि भारत पहले रूस, ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों से सस्ता तेल खरीदता था।

लेकिन अब अमेरिका के दबाव के कारण भारत की नीतियों में बदलाव आया है।

उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने से मना किया और टैरिफ लगाने की धमकी दी।

इसके कारण भारत को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा।


पीएम मोदी पर साधा निशाना

कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी पर यह आरोप भी लगाया कि वे चुनावी रैलियों में ज्यादा व्यस्त रहते हैं और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर बात नहीं करते।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नियमित रूप से “मन की बात” कार्यक्रम करते हैं, लेकिन जब अमेरिका भारत के खिलाफ कोई निर्णय लेता है तो उस पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं देते।


एपस्टीन फाइल्स का भी किया जिक्र

अपने भाषण के दौरान खरगे ने तथाकथित एपस्टीन फाइल्स का भी जिक्र किया और दावा किया कि इनके जरिए प्रधानमंत्री पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि भारत सरकार पहले ही इन दावों को खारिज कर चुकी है और कहा है कि इन फाइल्स में प्रधानमंत्री का नाम होने का दावा पूरी तरह बेबुनियाद और आपत्तिजनक है।

सरकार ने इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है।


इंदिरा गांधी का दिया उदाहरण

खरगे ने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री Indira Gandhi का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि 1971 के युद्ध के समय इंदिरा गांधी ने अमेरिका के दबाव की परवाह नहीं की और स्वतंत्र निर्णय लेते हुए बांग्लादेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

खरगे ने सवाल उठाया कि आज की सरकार में वही दृढ़ता और स्वतंत्रता क्यों नहीं दिखाई देती।


गरीबों पर असर की चेतावनी

अपने संबोधन के अंत में खरगे ने कहा कि अगर मौजूदा नीतियां इसी तरह जारी रहीं तो इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और कमजोर वर्गों पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि किसी भी वैश्विक संकट या युद्ध की स्थिति में सबसे ज्यादा कठिनाइयां गरीब जनता को ही झेलनी पड़ती हैं।

इसलिए सरकार को विदेश नीति और आर्थिक नीतियों में संतुलन बनाकर देश के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।


निष्कर्ष:

कर्नाटक के कलबुर्गी में दिए गए अपने भाषण में मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और व्यापार नीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कई विवादित बयान दिए और भारत-अमेरिका संबंधों पर सवाल उठाए।

हालांकि सरकार पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के बयान आगामी राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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