राजस्थान के जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजस्थान हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद अब 31 जुलाई 2026 से पहले चुनाव कराने की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ गई है। कोर्ट के आदेश के बाद संभावित प्रत्याशी भी सक्रिय नजर आने लगे हैं और गांवों में चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने स्पष्ट निर्देशों में कहा है कि राज्य सरकार ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने का हवाला देकर पंचायत और निकाय चुनावों को और अधिक समय तक नहीं टाल सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निर्धारित समय सीमा में पूरा करना आवश्यक है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जयपुर जिले की कुल 22 पंचायत समितियों और 596 ग्राम पंचायतों में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। संभावित उम्मीदवारों ने जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है और ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी रणनीतियों पर चर्चा शुरू हो गई है।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को भी निर्देश दिए हैं कि शहरी निकायों के वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य 20 जून 2026 तक पूरा किया जाए। वर्तमान स्थिति में इस समय सीमा को पूरा करने के लिए एक महीने से भी कम समय शेष बचा है।
गौरतलब है कि इससे पहले अदालत ने 15 अप्रैल तक चुनाव कराने की बात कही थी, लेकिन राजस्थान सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने का हवाला देते हुए असमर्थता जताई थी। अब अदालत के सख्त रुख के बाद प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो गई है और चुनावी तैयारियों में तेजी लाई जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।
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