राजस्थान दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उस राष्ट्रभक्ति की याद है जिसने पाकिस्तान के मंसूबों को मिट्टी में मिला दिया। 1948 में आजादी के बाद पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने जैसलमेर को पाकिस्तान में विलय करने के लिए हर संभव दांव-पेच किए। उन्होंने अपने मंत्री हासम सिलावटा को विशेष विमान से जैसलमेर भेजा और महारावल जवाहर सिंह के सामने ‘कोरा कागज’ और ‘मनचाही शर्तें’ का प्रस्ताव रखा। संदेश स्पष्ट था – महारावल अपनी शर्तें लिख दें, बस जैसलमेर पाकिस्तान में शामिल हो जाए।
महारावल जवाहर सिंह ने हासम सिलावटा को अपने दीवान से मिलने को कहा, और दीवान ने प्रस्ताव को खारिज कर हासम को कड़ी फटकार दी। हासम खाली हाथ लौट गए। इसके बाद जिन्ना ने महारावल गिरधर सिंह के सामने वही प्रस्ताव रखा, लेकिन जवाब साफ था – जैसलमेर भारत के साथ खड़ा रहेगा। इस अडिग निर्णय ने जोधपुर और बीकानेर रियासतों के लिए भी मार्ग प्रशस्त किया। मार्च 1949 में जैसलमेर सहित कई रियासतों के एकीकरण के साथ ‘वृहद राजस्थान’ का गठन हुआ।
आज जैसलमेर भारत की पश्चिमी सीमा का अभेद्य दुर्ग है, जहां भारतीय सेना और बीएसएफ के जवान मरुधरा की रक्षा कर रहे हैं। 50 डिग्री की गर्मी में पवन चक्कियां बिजली उत्पादन कर रही हैं, रेतीले टीले और सोनार किले की चमक इसे ग्लोबल टूरिज्म हब बनाती हैं। सांस्कृतिक और सामरिक दृष्टि से जैसलमेर राजस्थान की पहचान है।
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