राजस्थान देश में दूध उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर है, जिसकी हिस्सेदारी 14.82 प्रतिशत है। राज्य में जयपुर, सीकर, नागौर, जोधपुर और बाड़मेर जिले प्रमुख दुग्ध उत्पादक हैं, और नागौर जिला मवेशियों की उच्च आबादी और सक्रिय पशुपालकों के कारण दूध उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है। राज्य में दूध उत्पादन में वृद्धि के पीछे नस्ल सुधार, पशुओं के स्वास्थ्य पर बढ़ता ध्यान, सरकारी योजनाओं का लाभ और डेयरी सहकारी समितियों का विस्तार शामिल हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय अब कृषि के साथ अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत बन चुका है। पानी की कमी और मानसून पर आधारित खेती के कारण किसान खेती के साथ पशुपालन करते हैं, जिससे उनकी आय बढ़ती है और राज्य की दुग्ध अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। सरकारी योजनाओं और नस्ल सुधार कार्यक्रमों के माध्यम से पशुपालकों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीके अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
राजस्थान की डेयरी अर्थव्यवस्था ग्रामीण आजीविका के लिए महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। राज्य के प्रमुख दुग्ध उत्पादक जिलों में जयपुर सर्वाधिक दूध उत्पादन करता है, वहीं नागौर जिले में भी बड़ी संख्या में गाय और भैंस पालन के माध्यम से दूध का उत्पादन किया जाता है। आने वाले वर्षों में आधुनिक तकनीक, बेहतर विपणन और वैज्ञानिक पशुपालन के माध्यम से राजस्थान के दूध उत्पादन में और वृद्धि की उम्मीद है।
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