अलवर, राजस्थान: राजस्थान के अलवर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने न केवल मानवता को शर्मसार किया है, बल्कि प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। रैणी थाना क्षेत्र में 11वीं कक्षा की एक 15 वर्षीय छात्रा के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। मामले के मुख्य आरोपी राहुल सैनी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जिसके पास से बरामद मोबाइल ने इस पूरे केस में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
घटना बीते गुरुवार की है। रोज की तरह पीड़िता सुबह अपने घर से पैदल स्कूल के लिए निकली थी। लेकिन रास्ते में घात लगाए बैठे दरिंदों ने उसकी मासूमियत को कुचलने की साजिश पहले ही रच ली थी। पीड़िता के भाई द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, एक सफेद बोलेरो गाड़ी में सवार दो युवकों ने छात्रा को रास्ते में रोका और जबरन उसे गाड़ी के अंदर खींच लिया। विरोध करने पर आरोपियों ने छात्रा के हाथ बांध दिए और उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी ताकि वह रास्ता न पहचान सके।
बीच रास्ते में इन आरोपियों ने अपने एक और साथी को गाड़ी में बिठाया। तीनों ने मिलकर छात्रा को एक सुनसान जगह पर बने कमरे में ले जाकर बंधक बना लिया।
अज्ञात स्थान पर ले जाकर तीनों आरोपियों ने नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। हैवानियत यहीं नहीं रुकी; आरोपियों ने छात्रा के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो भी बना लिए। वारदात के बाद आरोपियों ने पीड़िता को मानसिक रूप से तोड़ने के लिए धमकाया कि अगर उसने मुंह खोला, तो उसके भाई को जान से मार दिया जाएगा। दोपहर करीब 1 बजे, आरोपी छात्रा को उसी स्थान के पास छोड़कर भागने लगे जहाँ से उसे उठाया था।
जैसे ही अपहरण और दरिंदगी की खबर गांव में फैली, ग्रामीण आक्रोशित हो उठे। जब आरोपी छात्रा को छोड़ने आए और वहां जुटी भीड़ को देखा, तो वे घबरा गए। पकड़े जाने के डर से आरोपी अपनी बोलेरो गाड़ी मौके पर ही छोड़कर भाग निकले। गुस्से से तमतमाए ग्रामीणों ने उस गाड़ी को आग के हवाले कर दिया जिससे छात्रा का अपहरण किया गया था। सूचना पर पहुँची रैणी पुलिस ने जलती गाड़ी को कब्जे में लेकर जांच शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजगढ़ डीएसपी मनीषा मीना खुद इस जांच की निगरानी कर रही हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी राहुल सैनी को धर दबोचा। पुलिस सूत्रों के अनुसार, राहुल के मोबाइल फोन से कई संदिग्ध और आपत्तिजनक सामग्री मिली है, जो यह संकेत देती है कि यह कृत्य सोची-समझी साजिश का हिस्सा था।
पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल मुआयना करवा लिया है और कोर्ट में 164 के तहत बयान भी दर्ज हो चुके हैं। अन्य दो आरोपी, जो दौसा जिले के बसवा के रहने वाले बताए जा रहे हैं, फिलहाल फरार हैं।
अलवर की यह घटना समाज में व्याप्त विकृत मानसिकता का कड़वा सच बयां करती है। पुलिस की तत्परता ने मुख्य आरोपी को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है, लेकिन फरार दो आरोपियों की गिरफ्तारी अभी भी बड़ी चुनौती है। ऐसे मामलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए त्वरित न्याय ही पीड़िता के जख्मों पर मरहम लगा सकता है।
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