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जेल से बाहर, लेकिन आज़ादी नहीं! सोनम रघुवंशी को जमानत तो मिली, पर शिलॉन्ग में ‘कैद’ क्यों?

इंदौर: के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बड़ा मोड़ सामने आया है। मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को करीब 320 दिन बाद जमानत मिल गई है। हालांकि, यह राहत पूरी आज़ादी नहीं है। शिलॉन्ग की अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि ट्रायल के दौरान सोनम शहर नहीं छोड़ सकती और उसे यहीं रहना होगा।

जेल से रिहाई, लेकिन सीमित आज़ादी

सोमवार को शिलॉन्ग कोर्ट ने जमानत मंजूर की, जिसके बाद मंगलवार शाम सोनम जेल से रिहा हो गई। उसके पिता देवी सिंह ने जमानत की औपचारिकताएं पूरी कीं। रिहाई के बाद मीडिया के सवालों से बचते हुए पिता-पुत्री वहां से निकल गए।

हालांकि, अदालत ने साफ कर दिया है कि बिना कोर्ट की अनुमति के सोनम शिलॉन्ग से बाहर नहीं जा सकती। यानी, इंदौर लौटना फिलहाल संभव नहीं है।

गिरफ्तारी में खामियां बनीं जमानत की वजह

सोनम को जमानत मिलने के पीछे सबसे अहम कारण पुलिस की प्रक्रिया में गंभीर खामियां रहीं। बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को स्पष्ट रूप से कारण नहीं बताया गया, जो कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन है।

कोर्ट ने इस तर्क को गंभीरता से लेते हुए कहा कि किसी भी आरोपी को गिरफ्तारी के समय आरोपों की जानकारी देना अनिवार्य है, ताकि वह अपना बचाव सही तरीके से कर सके।

पुलिस की 4 बड़ी गलतियां

अदालत में पेश दस्तावेजों के आधार पर पुलिस की चार प्रमुख चूकें सामने आईं:

  • अधूरा अरेस्ट फॉर्म: गिरफ्तारी फॉर्म में कई जरूरी कॉलम खाली पाए गए।
  • धाराओं में गड़बड़ी: केस डायरी और दस्तावेजों में अलग-अलग धाराएं दर्ज थीं।
  • वकील की अनुपस्थिति: पहली पेशी के दौरान कानूनी सहायता का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
  • बचाव के अधिकार का हनन: सही जानकारी न मिलने से आरोपी प्रभावी बचाव नहीं कर सकी।

इन खामियों ने अदालत को यह मानने पर मजबूर किया कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां हुई हैं।

लंबी हिरासत भी बनी राहत का आधार

सोनम 9 जून 2025 से जेल में बंद थी और करीब 10 महीने से ज्यादा समय न्यायिक हिरासत में बिता चुकी थी। इस दौरान केस की सुनवाई बेहद धीमी रही।

चार्जशीट 5 सितंबर 2025 को दाखिल हुई और 28 अक्टूबर को आरोप तय हुए, लेकिन अब तक 90 में से केवल 4 गवाहों की ही गवाही हो सकी है। इस देरी को भी अदालत ने जमानत देने का एक अहम आधार माना।

बचाव पक्ष की दलीलें और प्रोफाइल का असर

बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि सोनम का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह एक स्थायी निवासी है। साथ ही, वह एक कारोबारी परिवार से जुड़ी है, जिससे उसके फरार होने की संभावना कम है।

इसके अलावा, महिला होने के कारण जमानत में नरमी के सिद्धांत का भी हवाला दिया गया, जिसे अदालत ने आंशिक रूप से स्वीकार किया।

प्रॉसिक्यूशन की आपत्ति खारिज

मेघालय पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ कर सकती है या गवाहों को प्रभावित कर सकती है। लेकिन अदालत ने माना कि चार्जशीट और अन्य सबूत पहले ही न्यायिक निगरानी में हैं, इसलिए छेड़छाड़ की आशंका कम है।

अब आगे क्या?

अब इस केस में अगली सुनवाई और गवाहों की पेशी पर सबकी नजरें टिकी हैं। सोनम को हर सुनवाई में उपस्थित रहना होगा और कोर्ट के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।

सोनम रघुवंशी को मिली जमानत इस केस में एक बड़ा कानूनी मोड़ है, लेकिन यह पूरी राहत नहीं है। कोर्ट की सख्त शर्तें यह दर्शाती हैं कि मामला अभी भी गंभीर है। पुलिस की जांच प्रक्रिया में हुई गलतियां एक बार फिर कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। आने वाले समय में इस केस का फैसला कई अहम कानूनी मिसालें भी तय कर सकता है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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