नई दिल्ली। आजकल घरों की छत पर गार्डन (रूफ गार्डन) बनाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। हरियाली न केवल घर की सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि वातावरण को भी शुद्ध बनाती है। हालांकि, वास्तु शास्त्र में छत पर पौधे लगाने को लेकर कुछ महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि इन नियमों की अनदेखी करने पर घर में वास्तु दोष उत्पन्न हो सकते हैं और राहु व बुध जैसे ग्रहों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
वास्तु मान्यताओं के अनुसार छत के उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में भारी गमले या बड़े पेड़-पौधे नहीं रखने चाहिए। इस दिशा को देव स्थान माना जाता है, इसलिए इसे हल्का और साफ रखना शुभ माना जाता है। वहीं बड़े गमले दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम दिशा में रखना अधिक उपयुक्त माना जाता है।
वास्तु के अनुसार छत पर कैक्टस या अन्य कांटेदार पौधे लगाने से बचना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि ये पौधे घर में नकारात्मक ऊर्जा और तनाव का कारण बन सकते हैं। इसके बजाय तुलसी, मोगरा, चमेली, मनी प्लांट या अन्य सकारात्मक ऊर्जा से जुड़े पौधे लगाने की सलाह दी जाती है।
यदि छत पर गार्डन बनाया जा रहा है, तो पानी की निकासी की उचित व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। छत पर लंबे समय तक पानी जमा रहने से भवन को नुकसान पहुंच सकता है और वास्तु की दृष्टि से भी इसे शुभ नहीं माना जाता।
वास्तु शास्त्र की कुछ मान्यताओं के अनुसार यदि छत पर गार्डन गलत दिशा में बनाया जाए या अत्यधिक भारी संरचना तैयार कर दी जाए, तो इसका प्रभाव राहु और बुध से जुड़े सकारात्मक परिणामों पर पड़ सकता है। इसलिए गार्डन तैयार करने से पहले दिशा, पौधों का चयन और भार संतुलन का ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है।
ये जानकारी वास्तु शास्त्र और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसके समर्थन में आधुनिक विज्ञान का निर्णायक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। किसी भी वास्तु संबंधी निर्णय को अपनी आस्था और विवेक के अनुसार लें।
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