बांसवाड़ा। राजस्थान कांग्रेस की सियासत में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वरिष्ठ नेता सचिन पायलट चर्चा के केंद्र में हैं। वागड़-मेवाड़ के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे सचिन पायलट ने बांसवाड़ा में मीडिया से बातचीत के दौरान अशोक गहलोत के हालिया बयान पर ऐसा जवाब दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
पत्रकारों ने जब पायलट से गहलोत के उस बयान पर प्रतिक्रिया मांगी, जिसमें उन्होंने सचिन पायलट को "अपने बेटे जैसा" बताया था, तो पायलट मुस्कुराते हुए बोले, "आपने उनका स्टेटमेंट दोहरा दिया है, उसे गांठ बांधकर रखिए... उसे संभालकर रखिए, वही अंततः सत्य है और वही रहेगा।" पायलट का यह संक्षिप्त लेकिन अर्थपूर्ण जवाब अब राजनीतिक विश्लेषण का विषय बन गया है।
दरअसल, पिछले महीने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि "सचिन पायलट मेरे बेटे की तरह हैं। हम उनके दुश्मन नहीं हैं। बचपन से ही उनके प्रति मेरे मन में स्नेह रहा है। जब मैं सांसद था, तब सचिन पायलट और मेरा बेटा वैभव दोनों छोटे बच्चे थे। आज भी मैं उन्हें उसी स्नेह और अपनत्व की नजर से देखता हूं।"
गहलोत के इस बयान को कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चली आ रही खींचतान को खत्म करने की पहल के रूप में भी देखा गया था।
सचिन पायलट की प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग इसे दोनों नेताओं के बीच रिश्तों में आई नरमी का संकेत मान रहे हैं, तो कुछ इसे एक संतुलित और कूटनीतिक जवाब के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि पायलट ने इस मुद्दे पर कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं की, लेकिन उनका यह बयान—"गहलोत के बयान को गांठ बांधकर रखिए, वही अंतिम सत्य रहेगा"—राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में एक नई चर्चा का विषय बन गया है। आगामी दिनों में दोनों नेताओं के संबंधों और पार्टी की रणनीति पर इसका क्या असर पड़ता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
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