जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के 25 सितंबर 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर दिए गए बयान के बाद राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। गहलोत ने स्पष्ट किया कि उस दिन हुई बगावत पार्टी हाईकमान या सोनिया गांधी के खिलाफ नहीं थी, बल्कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावनाओं के विरोध में हुई थी। उन्होंने कहा कि यदि उन्होंने पार्टी हाईकमान के खिलाफ बगावत की होती, तो वे मुख्यमंत्री पद पर बने नहीं रह सकते थे।
गहलोत ने बताया कि उस समय सचिन पायलट का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा में था, जिससे विधायकों में असंतोष पैदा हुआ। करीब 100 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा कि जब पार्टी हाईकमान मुख्यमंत्री बदलता है तो आमतौर पर 90 प्रतिशत विधायक नए मुख्यमंत्री के साथ चलते हैं, लेकिन उस दिन स्थिति अलग थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वे विधायक दल के नेता होने के नाते बैठक में प्रस्ताव पारित करवाने के लिए जिम्मेदार थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने सुझाव दिया था कि बैठक को अगले दिन स्थगित किया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। बाद में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर माफी भी मांगी थी।
गहलोत ने मानेसर प्रकरण में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की भूमिका पर भी आरोप लगाया और कहा कि भाजपा नेता जफर इस्लाम भी इसमें शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सचिन पायलट को केंद्रीय मंत्री बनाए जाने में मदद की थी, लेकिन पायलट ने सार्वजनिक रूप से इसका उल्लेख नहीं किया।
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