बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में फंसे पूर्व जलदाय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेश जोशी को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान उनकी गिरफ्तारी को अवैध बताने वाली याचिका को खारिज करते हुए किसी भी प्रकार की न्यायिक राहत देने से इनकार कर दिया।
यह याचिका उनके बेटे रोहित जोशी द्वारा बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के रूप में दायर की गई थी, जिसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों का हवाला देते हुए गिरफ्तारी प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। हालांकि, जस्टिस उमाशंकर व्यास और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी कानून सम्मत और प्रक्रिया अनुसार की गई थी।
सरकारी पक्ष की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद और अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी ने अदालत में मजबूत पैरवी करते हुए एसीबी की केस डायरी और साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर अदालत ने याचिका को अस्वीकार कर दिया।
यह मामला लगभग 960 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन टेंडर घोटाले से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के आधार पर निजी कंपनियों को ठेके दिए गए और बदले में करोड़ों रुपये के कमीशन व रिश्वत का लेनदेन हुआ। जांच एजेंसियों के अनुसार इस मामले में सरकारी अधिकारियों और तत्कालीन मंत्री स्तर तक मिलीभगत की आशंका है।
इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी PMLA के तहत कार्रवाई करते हुए महेश जोशी को गिरफ्तार किया था, जहां वे लगभग 7 महीने जेल में रहे थे। बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिली थी। अब एसीबी की कार्रवाई के बाद वे फिर से न्यायिक हिरासत में हैं।
इस मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. सुबोध अग्रवाल भी आरोपी हैं, जिन्हें पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वे वर्तमान में जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी और राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
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