जयपुर, 21 सितंबर। राजस्थान में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने चिकित्सा संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी पर जोर दिया है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सभी चिकित्सा संस्थानों में मरीजों की संख्या और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं के आधार पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत की मैपिंग कर आवश्यकतानुसार भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव सोमवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान एवं फॉलोअप, प्रसव सखी कार्यक्रम और नवजात शिशु देखभाल सेवाओं की समीक्षा कर रहे थे।
बैठक में 6 सितंबर से 17 सितंबर तक प्रदेश में हुई मातृ मृत्यु की अस्पतालवार समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने संबंधित अस्पताल प्रभारियों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों से प्रत्येक मामले की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित फॉलोअप और प्रसव पूर्व जांच की लगातार निगरानी की जा रही है। विभाग के अनुसार, अगस्त में 73 मातृ मृत्यु के मामले सामने आए थे, जबकि सितंबर में यह संख्या घटकर 35 रह गई।
मुख्य सचिव ने उदयपुर जिले में हुई मातृ मृत्यु के मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के निदेशालय स्तर से टीम भेजकर वहां की व्यवस्थाओं और मामलों की विस्तृत समीक्षा करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने मेडिकल कॉलेजों में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (OT) के अपग्रेडेशन पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने अस्पतालों में होने वाले ऑपरेशन के भार के आधार पर मॉड्यूलर ओटी की जरूरत तय करने के निर्देश दिए। जहां अतिरिक्त मॉड्यूलर ओटी की आवश्यकता है, वहां संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि आवश्यकता होने पर मॉड्यूलर ओटी के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को बजट प्रस्ताव भेजा जाए। मेडिकल कॉलेजों में मॉड्यूलर ओटी के अपग्रेडेशन की नियमित मॉनिटरिंग करने के भी निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने प्रसूताओं की सुविधा के लिए संचालित प्रसव सखी कार्यक्रम को और प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिला के अस्पताल पहुंचने से लेकर प्रसव और प्रसव के बाद तक जरूरी सहायता एवं सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। इसके लिए संबंधित स्टाफ के बीच बेहतर समन्वय और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मेडिकल कॉलेजों में संचालित नियोनेटल आईसीयू (NICU) तथा जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में संचालित SNCU और NICU की नियमित समीक्षा के निर्देश भी दिए गए।
मुख्य सचिव ने कहा कि इन इकाइयों में जरूरी उपकरण, दवाइयां और प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध रहना चाहिए। गंभीर स्थिति वाले नवजात शिशुओं को समय पर बेहतर उपचार मिले और जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर करने की व्यवस्था प्रभावी होनी चाहिए।
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने कहा कि सभी जिलों में संबद्ध मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा अन्य चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टरों की नियमित मेंटॉरिंग जारी रखी जाए। उन्होंने उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को चारों प्रसव पूर्व जांच समय पर उपलब्ध कराने और प्रसव के दौरान तथा प्रसव के बाद आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने रेफरल सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया, ताकि जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर उच्च चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाया जा सके।
बैठक में मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम, प्रबंध निदेशक आरएमएससीएल पुखराज सैन, आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण अविचल चतुर्वेदी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजस्थान हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी हरजीलाल अटल, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा और निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
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