यह भारत का एशियन गेम्स 2026 में आठवां गोल्ड मेडल है, जबकि कंपाउंड तीरंदाजी में यह भारत का दूसरा स्वर्ण है।
फाइनल मुकाबले में चिकिथा तनीपर्थी और साहिल जाधव की भारतीय जोड़ी का सामना दक्षिण कोरिया की टीम से हुआ। भारतीय तीरंदाजों ने शुरुआत से ही शानदार निशाने लगाए और मुकाबले में बढ़त बनाए रखी।
पहले हाफ के बाद भारत 80-78 की बढ़त पर था। हालांकि मुकाबले के अंतिम चरण में दक्षिण कोरिया ने वापसी करते हुए स्कोर बराबर कर दिया। निर्धारित तीर पूरे होने के बाद दोनों टीमों का स्कोर 157-157 रहा।
157-157 की बराबरी के बाद मुकाबले का फैसला शूट-ऑफ से हुआ। इस निर्णायक चरण में भारतीय जोड़ी ने दबाव के बीच बेहतर निशाने लगाए और दक्षिण कोरिया को पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा कर लिया।
चिकिथा और साहिल की इस जीत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कंपाउंड मिक्स्ड टीम इवेंट लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक में पहली बार शामिल होने जा रहा है। एशियन गेम्स में इस स्पर्धा के विजेता को ओलंपिक कोटा स्थान मिलने का प्रावधान था।
एशियन गेम्स की कंपाउंड मिक्स्ड टीम क्वालिफिकेशन में भी चिकिथा तनीपर्थी और साहिल जाधव ने शानदार प्रदर्शन किया था। दोनों ने कुल 1414 अंक हासिल कर भारत को शीर्ष स्थान दिलाया था। चिकिथा ने 705 और साहिल ने 709 अंक बनाए थे।
इसके बाद नॉकआउट चरण में भारतीय जोड़ी ने मंगोलिया को 160-146 से हराया और क्वार्टर फाइनल में कजाकिस्तान को 159-154 से मात देकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी।
कंपाउंड तीरंदाजी के लिए इस एशियन गेम्स का महत्व इसलिए भी बढ़ गया था क्योंकि यह स्पर्धा LA 2028 ओलंपिक में पहली बार खेली जाएगी। एशियन गेम्स चैंपियन को इस इवेंट के जरिए ओलंपिक कोटा हासिल होना था। भारत की स्वर्ण पदक जीत के साथ अब देश ने इस कोटे पर कब्जा कर लिया है।
भारत की इस जीत ने एशियन गेम्स में तीरंदाजी में देश की मजबूत मौजूदगी को एक बार फिर सामने रखा है।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.