जानकारी के अनुसार, 10 अक्टूबर को उदयपुर के राणा प्रताप नगर रेलवे स्टेशन से गंगासागर के लिए विशेष ट्रेन रवाना हुई थी। इस यात्रा में उदयपुर, अजमेर और भरतपुर संभाग के कुल 970 वरिष्ठ नागरिक शामिल थे। यात्रा कार्यक्रम के मुताबिक, ट्रेन 12 अक्टूबर को गंगासागर पहुंची और इसके बाद कोलकाता में बेलूर मठ सहित अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन कराने की योजना थी। यात्रा 16 अक्टूबर को पूरी होनी है।
ट्रेन के कोच नंबर 6 में यात्रा कर रहे नरपत ने आरोप लगाया कि कोलकाता पहुंचने के बाद यात्रियों को आगे ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई थी। करीब 130 किलोमीटर के बस सफर के दौरान बुजुर्गों के बार-बार अनुरोध के बावजूद शौचालय के लिए बस नहीं रोकी गई। इसके बाद यात्रियों को सड़क पर इंतजार करना पड़ा। उनका कहना है कि करीब छह घंटे तक परेशानी झेलने के बाद पुलिसकर्मियों के हस्तक्षेप से संबंधित अटेंडेंट को बुलाया गया।
यात्रियों के अनुसार, ठहरने की व्यवस्था भी निर्धारित सुविधाओं के अनुरूप नहीं थी। आरोप है कि एक कमरे में छह से आठ बुजुर्गों को ठहराया गया। कुछ यात्रियों ने धर्मशाला में ठहराने, बेड की खराब व्यवस्था और बाथरूम में पानी नहीं आने की शिकायत भी की।
यात्रियों ने बताया कि सुबह चाय-नाश्ता मिलने में देरी हुई। कुछ यात्रियों को सुबह 11 बजे तक चाय-नाश्ता नहीं मिला, जबकि उन्हें होटल से चेक आउट करना था। इससे बुजुर्गों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
यात्री नरपत और ओमप्रकाश कुमावत ने खाने की गुणवत्ता को लेकर भी नाराजगी जताई। उनके आरोपों के मुताबिक, भोजन की पूरियां इतनी सख्त थीं कि कई बुजुर्ग उन्हें खा नहीं पाए। कुछ यात्रियों ने खाना बदबूदार होने और पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की शिकायत की।
ओमप्रकाश कुमावत का आरोप है कि भोजन के समय दो रोटी देने के बाद तीसरी रोटी देने से मना कर दिया गया। यात्रियों ने यह भी कहा कि शिकायत करने पर कुछ कर्मचारियों ने उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया और उन्हें धमकाया।
देवस्थान विभाग की इस योजना के तहत यात्रियों की सहायता के लिए 30 कर्मचारियों का स्टाफ लगाए जाने की जानकारी दी गई थी। प्रत्येक कोच में दो सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित थी। स्वास्थ्य सहायता के लिए एक डॉक्टर और दो नर्सिंगकर्मियों को भी साथ भेजने की व्यवस्था बताई गई थी।
हालांकि, यात्रियों का आरोप है कि जरूरत के समय जिम्मेदार कर्मचारी उपलब्ध नहीं थे और उन्हें स्वयं ही परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री वरिष्ठ नागरिक निःशुल्क तीर्थ यात्रा योजना का उद्देश्य बुजुर्गों को धार्मिक स्थलों की यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में यात्रियों की ओर से लगाए गए आरोपों ने यात्रा प्रबंधन और सुविधाओं पर सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल यात्रियों द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। मामले में विभाग की प्रतिक्रिया और व्यवस्थाओं की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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