पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली में करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक है। इस दौरान महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना और करवा चौथ की कथा कर सकती हैं।
पूजा का मुहूर्त समाप्त होने के बाद व्रती महिलाओं को चंद्रमा के दर्शन का इंतजार करना होगा। चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा की परंपरा पूरी करने के बाद व्रत खोला जाता है।
करवा चौथ पर चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में अंतर हो सकता है। पंचांग में दिए गए समय के अनुसार प्रमुख शहरों में चांद निकलने का संभावित समय इस प्रकार है:
नई दिल्ली: रात 8:17 बजे
नोएडा: रात 8:16 बजे
चंडीगढ़: रात 8:12 बजे
लखनऊ: रात 8:06 बजे
पटना: रात 7:52 बजे
कोलकाता: रात 7:47 बजे
जयपुर: रात 8:28 बजे
अहमदाबाद: रात 8:52 बजे
मुंबई: रात 9:00 बजे
चंद्रोदय के समय और वास्तविक चंद्र दर्शन में मौसम, बादलों और आसपास की इमारतों के कारण अंतर हो सकता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाएं अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि कर लें।
दिन: गुरुवार
पक्ष: कृष्ण पक्ष
मास: कार्तिक (पूर्णिमांत), आश्विन (अमांत)
चतुर्थी तिथि: रात 10:09 बजे तक, इसके बाद पंचमी
रोहिणी नक्षत्र: सुबह 11:11 बजे तक, इसके बाद मृगशिरा
योग: परिघ, इसके बाद शिव
करण: बव, बालव और इसके बाद कौलव
सूर्योदय: सुबह 6:31 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:38 बजे
चंद्र राशि: वृषभ, रात 10:06 बजे तक; इसके बाद मिथुन
आज चतुर्थी तिथि रात 10:09 बजे तक रहेगी। रोहिणी नक्षत्र सुबह समाप्त होकर मृगशिरा नक्षत्र शुरू होगा। शाम की पूजा और चंद्रोदय के समय मृगशिरा नक्षत्र रहेगा।
धार्मिक कार्यों और शुभ कार्यों के लिए दिन के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:48 से 5:39 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 से दोपहर 12:27 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:56 से 2:40 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:38 से 6:04 बजे तक
राहुकाल: दोपहर 1:28 से 2:52 बजे तक
यमगण्ड: सुबह 6:31 से 7:54 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 9:18 से 10:41 बजे तक
दुष्टमुहूर्त: सुबह 10:13 से 10:58 बजे तक और दोपहर 2:40 से 3:25 बजे तक
वर्ज्य काल: शाम 4:17 से 5:45 बजे तक
ध्यान दें कि राहुकाल और अन्य सामान्य मुहूर्तों से अलग करवा चौथ की विशेष पूजा का समय शाम 5:38 से 6:56 बजे तक बताया गया है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर संभव है।
पंचांग गणना के अनुसार, पिछले दिन से चल रही भद्रा 29 अक्टूबर की रात 1:06 बजे समाप्त हो चुकी होगी। इसलिए सुबह से लेकर शाम की पूजा और चंद्रोदय के समय तक भद्रा नहीं रहेगी।
29 अक्टूबर को करवा चौथ के साथ वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी रखा जा रहा है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने की धार्मिक परंपरा है। करवा चौथ और संकष्टी चतुर्थी एक ही दिन होने के बावजूद दोनों व्रतों की पूजा-विधि, कथा और धार्मिक मान्यताएं अलग हैं।
पूजा के लिए अपने शहर के अनुसार शुभ मुहूर्त की जानकारी लें।
चंद्रोदय के समय को ध्यान में रखते हुए पूजा की तैयारी करें।
चंद्र दर्शन के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अर्घ्य देकर व्रत खोलें।
मौसम या बादलों के कारण चांद दिखाई देने में देरी हो सकती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी पंचांग और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग स्थानों और पंचांगों के अनुसार समय में अंतर संभव है। किसी भी धार्मिक परंपरा का पालन करने से पहले स्थानीय पंचांग या संबंधित विशेषज्ञ से जानकारी प्राप्त करें।
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