कार्डियो थोरेसिक वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग के हेड एवं सीनियर प्रोफेसर डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि मरीज के हार्ट के वॉल्व के साथ मुख्य धमनी में गंभीर खराबी और ब्लॉकेज था। इसे देखते हुए बेंटाल प्रोसिजर, आर्च रिप्लेसमेंट और कोआर्कटेशन ऑफ एओर्टा (COA) रिपेयर जैसी तीन जटिल प्रक्रियाएं एक साथ की गईं।
डॉक्टरों के अनुसार, पूरी सर्जरी में करीब 8 घंटे लगे। इस दौरान मरीज को लगभग 6 यूनिट ब्लड चढ़ाना पड़ा। ऑपरेशन की जटिलता को देखते हुए विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिसमें मरीज के शरीर का तापमान घटाकर प्रमुख अंगों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई।
सीनियर डॉक्टर मोहित शर्मा ने बताया कि सर्जरी के दौरान डीप हाइपोथर्मिक सर्कुलेटरी अरेस्ट (DHCA) तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इसके तहत मरीज के शरीर का तापमान लगभग 18 डिग्री सेल्सियस तक कम किया गया और करीब 45 मिनट तक शरीर में रक्त संचार अस्थायी रूप से रोका गया, ताकि मुख्य धमनी की जटिल सर्जरी की जा सके।
सर्जरी के दौरान शरीर के प्रमुख अंगों को कम तापमान की स्थिति में सुरक्षित रखना डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती थी। दी गई जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया में लिवर, किडनी, पैंक्रियाज और आंत सहित प्रमुख अंगों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। इसका उद्देश्य रक्त संचार रोकने की सीमित अवधि में अंगों को संभावित नुकसान से बचाना था।
डॉक्टरों के मुताबिक, इस तरह की जटिल सर्जरी पर करीब 25 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है। इसमें मुख्य धमनी को बदलने की प्रक्रिया की लागत लगभग 8 लाख रुपये बताई गई है।
इस जटिल सर्जरी को डॉ. मोहित शर्मा, डॉ. सुनील दीक्षित, डॉ. सौरभ मित्तल, डॉ. वक्ता राम चौधरी, डॉ. गौरव, डॉ. प्रितांशी सहित अन्य चिकित्साकर्मियों की टीम ने अंजाम दिया।
SMS अस्पताल के डॉक्टरों ने इसे देश में अपनी तरह का पहला मामला बताया है, जिसमें हार्ट और मुख्य धमनी से जुड़ी तीन जटिल सर्जिकल प्रक्रियाएं एक साथ की गईं। हालांकि, देश में इस तरह का पहला मामला होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की गई है।
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