राज्य में केंद्र सरकार की ओर से संचालित लगभग 2 लाख 61 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं में से 1 लाख 22 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली 29 परियोजनाओं का काम 80 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। वहीं, प्रदेश में प्रगतिरत 82 केंद्रीय परियोजनाओं पर अब तक 1 लाख 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।
केंद्र सरकार की पैमाना रिपोर्ट के अनुसार बाड़मेर में देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी के साथ पेट्रोकेमिकल निकासी एवं विपणन टर्मिनल का काम भी तेजी से आगे बढ़ा है। इस टर्मिनल का निर्माण 99 प्रतिशत पूरा हो चुका है।
जोधपुर एयरपोर्ट पर 480 करोड़ रुपये की लागत से घरेलू उड़ानों के लिए नए पैसेंजर टर्मिनल भवन का निर्माण किया गया है। वहीं, उदयपुर एयरपोर्ट के नए एकीकृत यात्री टर्मिनल भवन का निर्माण कार्य 88 प्रतिशत पूरा हो चुका है।
राजस्थान में विद्युत प्रसारण और वितरण क्षेत्र की 19 प्रमुख परियोजनाओं पर 98 हजार 759 करोड़ रुपये की लागत से काम चल रहा है। इनमें राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी जोन फेज-4 की बाड़मेर कॉम्प्लेक्स 6 गीगावाट सोलर परियोजना और फतेहगढ़-द्वितीय ट्रांसमिशन सिस्टम जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।
इन परियोजनाओं से प्रदेश की ऊर्जा क्षमता बढ़ने के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राजस्थान की भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है।
रेलवे सेक्टर में 33 हजार 572 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 22 बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें बीकानेर-मेड़ता-जोधपुर, अजमेर-चित्तौड़गढ़-उदयपुर और सादुलपुर-रतनगढ़ रेल लाइन परियोजनाएं प्रमुख हैं।
वहीं, राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ी 22 परियोजनाओं पर 16 हजार 241 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा शहरी सार्वजनिक परिवहन के विकास के लिए 14 हजार 222 करोड़ रुपये की लागत से कार्य प्रगतिरत हैं।
राजधानी जयपुर में यातायात का दबाव कम करने के लिए भी बड़ी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। केंद्र सरकार के सहयोग से 11 हजार 764 करोड़ रुपये की लागत वाली जयपुर रिंग रोड (उत्तर) परियोजना को पूरा किया जाएगा।
इसके साथ ही 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना भी शहर के परिवहन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
राजस्थान में लंबे समय से लंबित जल परियोजनाओं को भी गति मिली है। राम जल सेतु लिंक परियोजना के माध्यम से प्रदेश के 17 जिलों के 3 करोड़ से अधिक लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने और लगभग 4 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा देने का लक्ष्य है।
इसके अलावा यमुना, किशाऊ और नर्मदा जल समझौतों से प्रदेश की भविष्य की जल आवश्यकताओं को पूरा करने और जल सुरक्षा मजबूत करने का रास्ता तैयार हुआ है।
राजस्थान को मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने के लिए जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र जैसी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। वहीं, माही बांसवाड़ा परमाणु विद्युत परियोजना भी प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सरकार का मानना है कि केंद्र और राज्य के समन्वय से चल रही इन परियोजनाओं से प्रदेश में निवेश, औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। आने वाले वर्षों में ये परियोजनाएं राजस्थान को देश के अग्रणी विकसित राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.