रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत का रक्षा उत्पादन 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। सरकार ने वर्ष 2029 तक इसे 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
उन्होंने रक्षा निर्यात में हुई बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया। वर्ष 2014 में भारत का रक्षा निर्यात 2,000 करोड़ रुपये से कम था, जो अब बढ़कर करीब 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। रक्षा निर्यात के लिए 50,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में नई तकनीक और स्वदेशी हथियारों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। DRDO की ओर से नई योजनाएं शुरू की जा रही हैं और आधुनिक हथियारों एवं मिसाइलों का परीक्षण किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की कंपनियों, MSME और बड़े उद्योगों को समान अवसर दिए जा रहे हैं। सरकार रक्षा क्षेत्र में 'होल ऑफ द नेशन' अप्रोच के साथ आगे बढ़ रही है, जिसमें देश के सभी संबंधित क्षेत्रों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
रक्षा मंत्री ने सेना के 'असनी भैरव' और 'शक्ति बाण' जैसे नए प्लेटफॉर्म का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सैन्य आधुनिकीकरण का अर्थ केवल नए हथियार खरीदना नहीं है, बल्कि ऑपरेशनल तैयारियों, तकनीकी क्षमता और मानव संसाधन को मजबूत करना भी है।
बैठक में भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण को प्रमुख विषय बनाया गया। रक्षा मंत्री ने कहा कि वैश्विक सुरक्षा और बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच सेनाओं का आधुनिकीकरण समय की जरूरत है।
उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-ईरान तनाव का जिक्र करते हुए बताया कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में तीनों सेनाओं के स्ट्रक्चर और फॉर्मेशन में बदलाव कर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है।
रक्षा मंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार ने रक्षा आधुनिकीकरण के लिए लगातार बजट में बढ़ोतरी की है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश का रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। वहीं, आधुनिकीकरण और कैपिटल प्रोक्योरमेंट के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने रक्षा बजट के प्रभावी उपयोग, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मजबूत करने पर जोर दिया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि दिल्ली से बाहर बैठक आयोजित करने का उद्देश्य समिति के सदस्यों को अधिक समय तक चर्चा का अवसर देना और सीमावर्ती एवं अग्रिम क्षेत्रों की जमीनी परिस्थितियों को समझना है।
बैठक के दौरान समिति के सदस्यों की ओर से दिए गए सुझावों को भी महत्वपूर्ण बताया गया। रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक, स्वदेशी उत्पादन और बेहतर मानव संसाधन के माध्यम से भारतीय सशस्त्र बलों को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।
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