मामला बालोतरा जिले के पचपदरा क्षेत्र के नेवाई गांव का बताया जा रहा है। किसान मांगीलाल मेघवाल ने करीब एक साल पहले एक प्लॉट बेचा था। इससे उसे करीब 5 लाख रुपये मिले थे। वह इन पैसों से खेत में कमरा बनाना चाहता था।
किसान को डर था कि घर में पैसे रखने पर चोरी हो सकती है या परिवार के सदस्य रकम खर्च कर सकते हैं। इसी वजह से उसने एक रात पांच लाख रुपये पॉलीथीन की थैली में रखकर खेत में गड्ढा खोदा और वहां छिपा दिए। इसकी जानकारी उसने पत्नी और बेटों को भी नहीं दी।
कुछ समय बाद जब मकान बनाने के लिए पैसों की जरूरत पड़ी तो किसान ने रकम निकालने की कोशिश की, लेकिन वह यह भूल चुका था कि 10 बीघा के खेत में पैसे किस जगह दबाए थे।
काफी तलाश के बावजूद जब पैसे नहीं मिले तो उसने आखिरकार पत्नी और बेटों को इसकी जानकारी दी। परिवार ने भी काफी खोजबीन की, लेकिन रकम का कोई पता नहीं चला।
करीब एक साल बाद बारिश के बाद खेत में बुवाई का काम शुरू हुआ। इसी दौरान पैसों की थैली जमीन से बाहर आ गई। किसान की पत्नी और बेटा खेत में तारबंदी ठीक कर रहे थे, तभी उनकी नजर उस थैली पर पड़ी।
थैली खोलने पर परिवार के होश उड़ गए। उसमें रखे 500-500 रुपये के नोट दीमक से बुरी तरह खराब होकर टुकड़ों में बदल चुके थे।
खराब हुए नोटों को लेकर परिवार पहले पचपदरा स्थित एसबीआई बैंक पहुंचा, लेकिन नोटों की हालत देखकर उन्हें बदलने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद परिवार बालोतरा की मुख्य बैंक शाखा भी पहुंचा, लेकिन वहां से भी तत्काल राहत नहीं मिली।
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक कर्मचारियों ने बताया कि यदि नोटों पर सीरियल नंबर और अन्य जरूरी पहचान संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से मौजूद हो, तो उन्हें बदलने की प्रक्रिया संभव हो सकती है और इसके लिए जयपुर जाने की सलाह दी गई।
किसान ने चोरी से बचाने के लिए अपनी जिंदगी की बड़ी कमाई खेत में सुरक्षित समझकर छिपाई थी, लेकिन भूलने और लंबे समय तक जमीन में दबे रहने के कारण दीमक ने उसकी मेहनत की कमाई बर्बाद कर दी।
यह मामला न सिर्फ बेहद चौंकाने वाला है, बल्कि बड़ी रकम को घर या खेत में छिपाकर रखने के जोखिम की ओर भी इशारा करता है
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