कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अनुसार, गैर-ऋणी किसानों की पॉलिसियों का सत्यापन निर्धारित प्रक्रिया के तहत करना संबंधित बीमा कंपनी की जिम्मेदारी होगी। वहीं ऋणी किसानों की पॉलिसी बनाते समय किसान की सहमति और वास्तविक बोई गई फसल का सही मिलान नहीं होने से कई बार क्लेम के समय विवाद सामने आते हैं। इन्हीं समस्याओं को रोकने के लिए पॉलिसी अनुमोदन से पहले फसल का सत्यापन अनिवार्य किया गया है।
वास्तविक और बीमित फसल के मिलान के लिए भौतिक सत्यापन, क्रॉप हेल्थ मॉनिटरिंग सर्वे और तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा। यदि किसी फसल का बीमित क्षेत्र औसत बुवाई क्षेत्र से अधिक पाया जाता है, तो संबंधित पॉलिसियों की अनिवार्य जांच होगी।
जरूरत पड़ने पर जिला कलेक्टर और कृषि अधिकारियों के समन्वय से ई-गिरदावरी और डीसीएस सर्वे रिपोर्ट के जरिए भी सत्यापन किया जाएगा। गलत तरीके से मंजूर पॉलिसियों को जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रिवर्ट किया जा सकेगा।
सरकार का उद्देश्य फसल बीमा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, क्लेम संबंधी विवाद कम करना और किसानों के हितों की रक्षा करना है।
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