कांग्रेस ने इस बार टिकट वितरण के लिए 'जिताऊ और टिकाऊ' चेहरों को प्राथमिकता देने की रणनीति बनाई है। पार्टी की कोशिश ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की है, जिनकी जनता के बीच मजबूत पकड़ के साथ संगठन में भी सक्रिय भूमिका रही हो।
कांग्रेस की रणनीति इस बार बागियों और भितरघात की संभावनाओं को कम करने की है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा नामांकन की आखिरी तारीख के आसपास जिला स्तर पर किए जाने की तैयारी है।
हालांकि, जिन दावेदारों का नाम तय हो चुका है, उन्हें पार्टी की ओर से नामांकन भरने का संकेत दे दिया गया है। जयपुर समेत कई शहरों में संभावित उम्मीदवारों ने पार्टी के इशारे के बाद अपना प्रचार अभियान भी शुरू कर दिया है।
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के मुताबिक कांग्रेस ने प्रदेश की सभी 200 विधानसभा सीटों पर कोऑर्डिनेटर भेजकर स्थानीय स्तर पर फीडबैक लिया था। इस फीडबैक के आधार पर करीब 90 फीसदी विधानसभा क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बन चुकी है।
जहां टिकट को लेकर विवाद या दावेदारों के बीच खींचतान है, वहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सचिन पायलट, भंवर जितेंद्र सिंह, हरीश चौधरी और सीपी जोशी समेत वरिष्ठ नेताओं की राय शामिल की जा सकती है।
कांग्रेस इस बार टिकट वितरण में केवल सिफारिशों के बजाय जीतने की क्षमता को प्राथमिक आधार बनाने का दावा कर रही है। पार्टी ने युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, एनएसयूआई, सेवादल और जमीनी कार्यकर्ताओं से भी संभावित नाम जुटाए हैं।
कांग्रेस की रणनीति ऐसे उम्मीदवारों को मौका देने की है, जिनकी स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ हो और जो लंबे समय से संगठन के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हों।
टिकट वितरण के साथ ही कांग्रेस ने निकाय चुनाव के लिए स्थानीय मुद्दों को भी धार देना शुरू कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने जयपुर की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
जूली ने स्मार्ट सिटी के नाम पर खर्च हुए धन, सफाई व्यवस्था, जलभराव और सीवर की समस्याओं को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि इस बार जयपुर नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड बनेगा।
निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस ने बीजेपी के गढ़ माने जाने वाले पाली में भी सेंध लगाने का दावा किया है। पाली नगर परिषद के पांच बार पार्षद रह चुके राकेश भाटी ने बीजेपी छोड़कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया है।
शनिवार को जयपुर स्थित कांग्रेस वॉर रूम में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की मौजूदगी में राकेश भाटी ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।
राकेश भाटी पाली नगर परिषद में पांच बार पार्षद रह चुके हैं। वह नगर परिषद में उपसभापति और सभापति की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वह पाली बीजेपी के जिला महामंत्री भी रह चुके हैं।
राकेश भाटी की पत्नी रेखा भाटी पाली नगर परिषद की निवर्तमान सभापति रही हैं। ऐसे में निकाय चुनाव से ठीक पहले उनका कांग्रेस में शामिल होना स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर राजस्थान निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपनी रणनीति के दो प्रमुख मोर्चे तय कर लिए हैं। एक ओर पार्टी टिकट वितरण को अंतिम रूप देने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय मुद्दों को लेकर बीजेपी सरकार पर हमला तेज किया जा रहा है।
इसके साथ ही बीजेपी के असंतुष्ट और प्रभावशाली स्थानीय नेताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश भी कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा बनती दिखाई दे रही है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कांग्रेस उम्मीदवारों के नामों का आधिकारिक ऐलान कब करती है और टिकट कटने के बाद पार्टी में बगावत कितनी चुनौती बनती है।
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