मंदिर महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि करीब 11 वर्ष पहले मंदिर के आसपास रहने वाले विभिन्न समाजों के लोगों ने भगवान गणेश को अर्पित करने के लिए कलश में गंगाजल लाने की अनुमति ली थी। धीरे-धीरे यह पहल एक भव्य कलश यात्रा का रूप लेती गई।
अब हर साल महिलाएं कलश यात्रा के रूप में गंगाजल लेकर मंदिर पहुंचती हैं और इस जल को भगवान गणेश को अर्पित करती हैं। सोमवार को भी कलश यात्रा के बाद गंगाजल से भगवान गणेश को स्नान कराया गया और विधि-विधान से अभिषेक किया गया।
इसके बाद भगवान गणेश को चोला चढ़ाकर नवीन पोशाक धारण कराई गई। विशेष शृंगार के बाद पूजा-अर्चना की गई और भगवान को मोदकों का भोग लगाया गया।
गणेश जन्मोत्सव के तहत मंगलवार को पुष्य नक्षत्र में भगवान गणपति का विशेष पंचामृत अभिषेक किया जाएगा। इसके लिए बड़ी मात्रा में सामग्री तैयार की गई है।
अभिषेक में 251 किलो दूध, 50 किलो दही, 25 किलो बूरा, 11 किलो शहद और 11 किलो घी के साथ गुलाब जल, केवड़ा जल और इत्र का इस्तेमाल किया जाएगा।
मंदिर प्रशासन की ओर से जन्मोत्सव के आगामी कार्यक्रमों को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और पूजा-अर्चना की व्यवस्थाएं भी की गई हैं।
पंचामृत अभिषेक के बाद भगवान गणेश को चोला चढ़ाया जाएगा और नवीन पोशाक पहनाई जाएगी। इसके साथ ही भगवान को नया मुकुट धारण कराया जाएगा। इस अवसर पर 1008 मोदकों का भोग भी लगाया जाएगा।
पूजन के बाद मंदिर में नई ध्वजा चढ़ाई जाएगी। महंत कैलाश शर्मा के अनुसार मंदिर परिवार की ओर से मुख्य ध्वजा चढ़ाने की परंपरा है, जबकि श्रद्धालुओं की ओर से 11 अन्य ध्वजाएं भी चढ़ाई जाती हैं।
उन्होंने बताया कि मंदिर की मुख्य ध्वजा हर 27 दिन में बदली जाती है, जबकि अन्य ध्वजाएं समय-समय पर बदली जाती रहती हैं।
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में जन्मोत्सव कार्यक्रम शुरू होने के साथ ही श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। आगामी दिनों में होने वाले विशेष अभिषेक, पूजा, शृंगार और भोग कार्यक्रमों को लेकर मंदिर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।
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