कांग्रेस की ओर से प्रत्याशियों को राजस्थान में ही सुरक्षित स्थान पर रखने की तैयारी की जा रही है। पार्टी ने संभावित विजयी उम्मीदवारों को रिसॉर्ट तक पहुंचाने की जिम्मेदारी विधायकों और विधानसभा चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों को सौंपी है।
बाड़ेबंदी से पहले कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की बैठक बुलाई। इसके बाद संभावित विजयी प्रत्याशियों को बसों के जरिए अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। पार्टी की कोशिश है कि चुनाव परिणाम आने तक सभी संभावित विजेता एकजुट रहें और किसी तरह के भीतरघात या क्रॉस वोटिंग की स्थिति पैदा न हो।
नगर निगम बोर्ड के गठन में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। ऐसे में कांग्रेस अपने संभावित विजेताओं के साथ-साथ पूरे सियासी समीकरण पर नजर बनाए हुए है।
14 सितंबर को नगर निकाय चुनाव के नतीजे घोषित होने हैं। इससे पहले ही कांग्रेस ने ‘ऑपरेशन रिजॉर्ट’ के जरिए संभावित विजयी पार्षदों को अपने साथ बनाए रखने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, संभावित विजेताओं के संपर्क और मूवमेंट पर भी नजर रखी जा रही है।
वहीं, बीजेपी भी अपने संभावित विजयी प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी पहले ही शुरू कर चुकी है। ऐसे में जयपुर नगर निगम चुनाव का परिणाम आने से पहले ही दोनों प्रमुख दलों के बीच बोर्ड बनाने को लेकर सियासी रणनीति तेज हो गई है।
अब नजर 14 सितंबर को आने वाले जनादेश पर रहेगी, जिसके बाद यह साफ होगा कि जयपुर नगर निगम की सत्ता किसके हाथ आती है और बोर्ड गठन में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण रहती है।
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