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राजस्थान को मिलेगी पहली पॉइजन डिटेक्शन टॉक्सिकोलॉजी लैब, अब ब्लड टेस्ट से ही पता चलेगा शरीर में कौन-सा जहर

जयपुर। राजस्थान के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ने जा रही है। राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह (एसएमएस) हॉस्पिटल में राजस्थान की पहली पॉइजन डिटेक्शन एंड ड्रग लेवल (टॉक्सिकोलॉजी) लैब पूरी तरह बनकर तैयार हो गई है। यह लैब इसी माह के अंत तक शुरू किए जाने की योजना है।

इस अत्याधुनिक लैब के शुरू होने से उन मरीजों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव आएगा, जो सांप के काटने, जहर खाने, दवाइयों की ओवरडोज या जहरीले कीड़े-मकोड़े के काटने से गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचते हैं।

5 मिनट से 3 घंटे में मिलेगी सटीक रिपोर्ट

डिपार्टमेंट ऑफ फोरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी के अधीन बनी इस लैब के नोडल अधिकारी डॉ. डी.के. शर्मा ने बताया कि लैब पूरी तरह तैयार है और सभी अत्याधुनिक मशीनें भी स्थापित की जा चुकी हैं।

उन्होंने बताया कि मरीज के खून, पेशाब या उल्टी में से किसी एक सैंपल की जांच कर 5 मिनट से लेकर 2–3 घंटे के भीतर यह स्पष्ट हो जाएगा कि शरीर में कौन-सा जहर है और उसकी मात्रा कितनी है। इससे डॉक्टरों को मरीज के लिए सटीक लाइन ऑफ ट्रीटमेंट तय करने और दवाइयों की सही डोज निर्धारित करने में मदद मिलेगी।

सांप कौन-सा था, अब पूछने की जरूरत नहीं

अब तक सर्पदंश के मामलों में इलाज के दौरान सबसे बड़ी समस्या यह होती थी कि मरीज या परिजन यह नहीं बता पाते थे कि किस प्रजाति के सांप ने काटा है। कई मामलों में तो परिजन सांप को जिंदा या मरा हुआ अस्पताल तक ले आते थे, ताकि डॉक्टर पहचान कर सकें कि वह जहरीला था या नहीं।

डॉ. डी.के. शर्मा के अनुसार, इस नई लैब के शुरू होने के बाद अब किस सांप ने काटा, यह पूछने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। ब्लड सैंपल से ही यह साफ हो जाएगा कि जहर किस प्रकार का है और उसी के अनुसार एंटी-वेनम और अन्य दवाइयां दी जा सकेंगी।

पूरे राजस्थान के लिए होगा लाभ

राजस्थान के दूर-दराज़ इलाकों से बड़ी संख्या में गंभीर मरीज रेफर होकर एसएमएस हॉस्पिटल पहुंचते हैं। इस लैब के शुरू होने से न सिर्फ जयपुर बल्कि पूरे राज्य के मरीजों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले सर्पदंश और जहर सेवन के मामलों में यह लैब जीवनरक्षक साबित होगी।


निष्कर्ष:

एसएमएस हॉस्पिटल में बनने जा रही राजस्थान की पहली पॉइजन डिटेक्शन टॉक्सिकोलॉजी लैब राज्य की चिकित्सा व्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। अब इलाज अनुमान पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक जांच पर आधारित होगा। इससे न केवल मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी, बल्कि डॉक्टरों को भी तेज, सटीक और प्रभावी उपचार का मार्ग मिलेगा।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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