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BMC मेयर रेस में नया ट्विस्ट: ‘शिंदे भी नहीं चाहते भाजपा का मेयर’, होटल पॉलिटिक्स पर संजय राउत का बड़ा दावा

मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मेयर पद को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) के नेता और सांसद संजय राउत के एक बयान ने राजनीतिक सस्पेंस को और बढ़ा दिया है। राउत ने दावा किया है कि एकनाथ शिंदे भी मुंबई में भाजपा का मेयर नहीं चाहते और शिंदे गुट के कई पार्षद इस बात से असहमत हैं कि मेयर पद भाजपा के पास जाए।

मीडिया से बातचीत में संजय राउत ने कहा कि शिवसेना शिंदे गुट के पार्षदों को होटल में रखकर नजरबंद किया गया है, जो कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्षदों को तोड़े जाने या अपहरण की आशंका बताकर उन्हें ताज होटल में बंद किया गया है और वहां पुलिस का कड़ा पहरा लगाया गया है।

राउत ने कहा कि यह पार्षदों के अधिकारों का खुला हनन है और एकनाथ शिंदे को तुरंत अपने 25 या 29 पार्षदों को रिहा करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना यूबीटी और उसके सहयोगी ताज होटल जाकर पार्षदों से मुलाकात करेंगे, भले ही इससे राजनीतिक हलचल और बढ़ जाए।

‘कई पार्षद हमारे संपर्क में’

संजय राउत ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि शिंदे गुट के कई पार्षद उनके संपर्क में हैं और वे भाजपा का मेयर नहीं चाहते। उन्होंने कहा, “कौन चाहता है कि मुंबई में भाजपा का मेयर बने? खुद एकनाथ शिंदे भी ऐसा नहीं चाहते।” राउत के इस बयान से महायुति के भीतर मतभेद की अटकलों को और हवा मिल गई है।

उद्धव ठाकरे के बयान से पहले ही बढ़ चुका है सस्पेंस

इससे पहले शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी कहा था कि अगर भगवान ने चाहा तो मुंबई में शिवसेना यूबीटी का ही मेयर बनेगा। उद्धव ठाकरे के बयान के बाद से ही राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई थी और अब संजय राउत के ताजा बयान ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है।

क्या है BMC की सत्ता का गणित

BMC चुनाव में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन वह अकेले दम पर मेयर बनाने की स्थिति में नहीं है। बहुमत के लिए उसे शिवसेना (शिंदे गुट) की जरूरत है, जिसने 29 सीटें जीती हैं। दोनों दलों को मिलाकर आंकड़ा 118 तक पहुंचता है, जबकि 227 सदस्यीय सदन में बहुमत का आंकड़ा 114 है।

महायुति के पास बहुमत से सिर्फ चार सीट ज्यादा हैं, जिससे किसी भी तरह की टूट-फूट उनके लिए खतरा बन सकती है।

दूसरी ओर, शिवसेना यूबीटी के पास 65 पार्षद हैं और कांग्रेस के 24 पार्षद हैं। इसके अलावा मनसे के 6, एनसीपी शरद पवार गुट का 1, एआईएमआईएम के 8 और सपा के 2 पार्षद भी हैं। अगर महाविकास अघाड़ी, महायुति के कुछ पार्षदों को अपने पाले में लाने में सफल हो जाती है, तो वह भी BMC में मेयर बना सकती है।


निष्कर्ष

मुंबई नगर निगम का मेयर पद इस बार सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। होटल पॉलिटिक्स, पार्षदों की खरीद-फरोख्त के आरोप और सहयोगी दलों के बीच बढ़ते मतभेदों ने इस मुकाबले को बेहद रोचक बना दिया है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री और शीर्ष नेतृत्व के फैसले तय करेंगे कि मुंबई की सत्ता किसके हाथ जाएगी।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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