जयपुर। जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के जोन-14 क्षेत्राधिकार में बालावाला के एलएनटी रोड पर कथित रूप से कृषि भूमि पर बिना वैध भू-रूपांतरण और आवश्यक स्वीकृतियों के बड़े पैमाने पर विला निर्माण का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि "यदुपति रेजीडेंसी" नामक परियोजना में लगभग 70 से 80 विला बनाए जा रहे हैं, जबकि परियोजना की वैधानिक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्माण नियमों के विपरीत हो रहा है तो JDA के जोन-14 अधिकारियों की नजर इस पर अब तक क्यों नहीं पड़ी? और यदि अधिकारियों को जानकारी थी तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर निर्माण कार्य बिना किसी प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं माना जा सकता।
कार्रवाई से बचने के लिए गृह प्रवेश का खेल?
क्षेत्र में चर्चा है कि संभावित JDA कार्रवाई से बचने के लिए कई निर्माणाधीन विला में जल्दबाजी में गृह प्रवेश कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। आरोप है कि अधूरे या विवादित निर्माण को आबाद दिखाकर भविष्य में कार्रवाई को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
आम ग्राहकों को सपने, भविष्य में संकट का खतरा
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि आम लोगों को वैध कॉलोनी और सुरक्षित निवेश का भरोसा देकर विला बेचे जा रहे हैं। यदि भविष्य में परियोजना की वैधानिक स्थिति पर सवाल उठते हैं या प्रशासनिक कार्रवाई होती है तो सबसे अधिक नुकसान उन परिवारों को उठाना पड़ सकता है जिन्होंने अपनी जीवनभर की पूंजी यहां निवेश की है।
JDA की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल
मामले ने जयपुर विकास प्राधिकरण की निगरानी और कार्रवाई प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि आम नागरिकों द्वारा किए गए छोटे-छोटे निर्माणों पर तो तत्काल कार्रवाई होती है, लेकिन इतने बड़े स्तर पर चल रहे निर्माण कार्य पर विभाग की चुप्पी समझ से परे है।
अब निगाहें आयुक्त पर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या JDA आयुक्त इस पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच करवाएंगे? क्या संयुक्त आयुक्त स्तर की जांच समिति गठित होगी? क्या जोन-14 के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी?
या फिर यह मामला भी कथित मिलीभगत के आरोपों और प्रशासनिक उदासीनता के बीच ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
जनता पूछ रही है…
बालावाला की जनता अब जवाब चाहती है। सवाल केवल 70-80 विला का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जिसके सामने इतने बड़े निर्माण कार्य पर लंबे समय तक कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दी।
"क्या JDA सच सामने लाएगा, या फिर मिलीभगत के आरोपों के साये में यह मामला भी दम तोड़ देगा?"
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