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राज्य स्तरीय वन मेला बना पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका का मजबूत मंच, 12,500 से ज्यादा लोगों ने किया अवलोकन

जयपुर। पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को प्रोत्साहन देने की दिशा में वन विभाग, राजस्थान द्वारा आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय वन मेला सोमवार को सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह मेला 9 फरवरी से 10 फरवरी तक सचिवालय नर्सरी, जयपुर में आयोजित किया गया, जिसमें आमजन की अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिली।

समापन समारोह में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) सुश्री शिखा मेहरा, मुख्य वन संरक्षक जयपुर श्री रामकरण खैरवा, डीसीएफ जयपुर (उत्तर), डीसीएफ जयपुर, डीसीएफ सीकर, डीसीएफ वन वर्धन सहित विभाग के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों ने मेले की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी पहल बताया।

12,500 से अधिक लोगों ने किया मेले का अवलोकन

राज्य स्तरीय वन मेले में लगभग 12 हजार 500 से अधिक आगंतुकों ने भाग लिया। आमजन, युवाओं, विद्यार्थियों और पर्यावरण प्रेमियों की भारी मौजूदगी ने यह स्पष्ट किया कि समाज में प्रकृति संरक्षण और वन संपदा के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है। मेले में जिला कलेक्टर जयपुर श्री जितेन्द्र कुमार सोनी, राज्य वन्यजीव बोर्ड की सदस्य श्रीमती नम्रता भारती सहित कई गणमान्य अतिथियों ने स्टॉल्स का निरीक्षण कर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

52 स्टॉल्स पर वन आधारित उत्पादों की शानदार प्रदर्शनी

मेले में कुल 52 स्टॉल्स लगाए गए, जिनमें विभिन्न वन आधारित एवं स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया गया। इनमें जड़ी-बूटियाँ, हर्बल उत्पाद, अचार, बिस्किट, जूट बैग, वर्मी कम्पोस्ट, आंवला उत्पाद, मसाले, अगरबत्ती, शहद, जामुन उत्पाद, गोंद, पंचकूटा, मिलेट्स, औषधीय उत्पाद, सोवेनियर, तीर-कमान, बीज, एलोवेरा उत्पाद, कैप, टी-शर्ट, जैकेट, लड्डू और लकड़ी के खिलौने प्रमुख रहे।

इन उत्पादों की अच्छी बिक्री से स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों, महिला समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को आर्थिक संबल मिला, जिससे उनकी आजीविका को नई मजबूती प्राप्त हुई।

ज्ञानवर्धक सत्रों ने दिया नई सोच और दिशा

वन मेले के दौरान कई तकनीकी और ज्ञानवर्धक सत्रों का आयोजन भी किया गया। विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए वन उत्पादों, औषधीय पौधों और सतत विकास की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

पूर्व हॉफ श्री दीप नारायण पांडे ने औषधीय पादपों के महत्व को रेखांकित किया। श्री सत्यनारायण चौधरी ने लसोड़ा प्रोपेगेशन तकनीक एवं इससे जुड़े उत्पादों की जानकारी दी। श्री देवेंद्र भारद्वाज ने वन औषधियों के महत्व पर, श्रीमती ऋषिता सिंह चारण ने गौ काष्ठ निर्माण पर, श्री महिपाल सिंह सिसोदिया ने वन संपदा संरक्षण की अवधारणा पर तथा श्री अशोक शर्मा ने मिलेट्स और मोटे अनाज के पोषण मूल्य एवं महत्व पर अपने विचार साझा किए।

इन सत्रों से युवाओं, वन विभाग के कार्मिकों और आमजन को स्वरोजगार, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में नई प्रेरणा मिली।

सम्मान और आभार के साथ हुआ समापन

समापन अवसर पर वन विभाग द्वारा सभी स्टॉल धारकों, स्वयं सहायता समूहों, विशेषज्ञों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके योगदान के लिए पारितोषिक प्रदान कर सम्मानित किया गया। विभाग ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजनों को निरंतर जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।


निष्कर्ष:

राज्य स्तरीय वन मेला केवल एक प्रदर्शनी या व्यापारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, जन-भागीदारी और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने का एक प्रभावी मंच बनकर उभरा। वन विभाग की यह पहल न केवल हरित सोच को बढ़ावा देती है, बल्कि स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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