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अजित पवार की मौत के बाद ‘पार्टी पर कब्जे’ की साजिश? रोहित पवार का बड़ा दावा, EC लेटर से मचा सियासी तूफान

महाराष्ट्र: की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी विवाद सामने आया है। अजित पवार की मौत के बाद उनकी पार्टी में कथित ‘पावर स्ट्रगल’ को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने दावा किया है कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने अजित पवार की मृत्यु के बाद संगठन पर कब्जा करने की कोशिश की।

मुंबई में बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रोहित पवार ने कहा कि अजित पवार की मौत के महज 18 दिन बाद, 16 फरवरी को प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और बृजमोहन श्रीवास्तव ने चुनाव आयोग को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में कथित तौर पर पार्टी संविधान में बदलाव का जिक्र किया गया था और सभी अधिकार वर्किंग प्रेसिडेंट को देने की बात कही गई थी।

रोहित पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संबंधित दस्तावेज भी मीडिया के सामने प्रस्तुत किए और पूरे मामले की आपराधिक जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यह केवल आंतरिक मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और पार्टी की संरचना से जुड़ा गंभीर विषय है।

रोहित के मुताबिक, अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को शुरुआत में इस पत्र की जानकारी नहीं थी। बाद में जब उन्हें इस बारे में पता चला, तो उन्होंने भी चुनाव आयोग को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर गहरे मतभेदों और अविश्वास की ओर इशारा करता है।

हालांकि इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील तटकरे ने बिना नाम लिए कहा कि कुछ लोग पार्टी के आंतरिक मामलों में अनावश्यक दखल दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी संविधान के तहत वर्किंग प्रेसिडेंट को पहले से ही कुछ अधिकार प्राप्त हैं, और इस मुद्दे को बेवजह तूल दिया जा रहा है।

एनसीपी के एक अन्य नेता ने भी रोहित पवार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह केवल भ्रम फैलाने की कोशिश है। उनके अनुसार, पार्टी के भीतर सभी निर्णय नियमानुसार और पारदर्शिता के साथ लिए गए हैं।

इस विवाद के बीच रोहित पवार ने अजित पवार की मौत से जुड़े एक अन्य पहलू पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्लेन क्रैश हादसे से जुड़ी कंपनी VSR वेंचर्स पर सवाल उठाते हुए कहा कि हादसे के बाद भी कंपनी को 80-90 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोग इस कंपनी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

गौरतलब है कि अजित पवार प्लेन क्रैश में 28 जनवरी को पुणे के बारामती एयरस्ट्रिप के पास उनकी मौत हो गई थी। इस हादसे में उनके साथ चार अन्य लोगों की भी जान गई थी। यह घटना पहले ही कई सवालों के घेरे में रही है।

रोहित पवार ने इस मामले में बेंगलुरु में जीरो FIR भी दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि उन्हें सलाह दी गई थी कि वे ऐसे राज्य में शिकायत दर्ज कराएं, जहां उन्हें निष्पक्ष जांच की उम्मीद हो। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक के बेंगलुरु में FIR दर्ज कराई।

अजित पवार की मृत्यु के बाद 26 फरवरी को सुनेत्रा पवार को पार्टी का नया अध्यक्ष चुना गया और उन्हें उपमुख्यमंत्री का पद भी सौंपा गया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने एनसीपी के भीतर चल रहे सत्ता संघर्ष को उजागर कर दिया है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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