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राजस्थान पुलिस की व्हाट्सएप एडवाइजरी: तुरंत बदलें ये 6 जरूरी सेटिंग्स, वरना निजी डेटा और बैंक खाते हो सकते हैं खतरे में

राजस्थान पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने बढ़ते साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के मामलों को देखते हुए व्हाट्सएप उपयोगकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि व्हाट्सएप इस्तेमाल करने वाले यूजर्स की एक छोटी सी लापरवाही उनकी निजी चैट, फोटो, वीडियो, निजी जानकारी और यहां तक कि बैंक खातों में जमा रकम के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है। साइबर अपराधियों द्वारा नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, इसलिए डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है।

एडीजी (साइबर अपराध) वी.के. सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर अपराधों को देखते हुए लोगों को अपने व्हाट्सएप अकाउंट की सुरक्षा सेटिंग्स तुरंत अपडेट करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कुछ जरूरी बदलाव करने से उपयोगकर्ता अपने अकाउंट को हैकिंग, डेटा चोरी, फर्जी लिंक, सिम स्वैपिंग और अन्य साइबर हमलों से काफी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं।

राजस्थान पुलिस द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार व्हाट्सएप उपयोगकर्ताओं को सबसे पहले अपने अकाउंट में टू-स्टेप वेरिफिकेशन (द्विस्तरीय सत्यापन) फीचर चालू करना चाहिए और एक मजबूत पिन सेट करना चाहिए। इससे अकाउंट पर एक अतिरिक्त सुरक्षा परत जुड़ जाती है और कोई भी व्यक्ति बिना पिन के अकाउंट तक पहुंच नहीं बना सकता।

इसके अलावा यूजर्स को अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स को केवल "माई कॉन्टैक्ट्स" तक सीमित रखने की सलाह दी गई है। प्रोफाइल फोटो, लास्ट सीन, स्टेटस और ग्रुप एड जैसी जानकारियों को सीमित रखने से अजनबी लोग निजी जानकारी तक पहुंच नहीं बना पाएंगे। इससे ऑनलाइन स्टॉकिंग और धोखाधड़ी की आशंका भी कम होगी।

पुलिस ने यूजर्स को मीडिया ऑटो-डाउनलोड फीचर बंद करने की भी सलाह दी है ताकि संदिग्ध फाइलें, वायरस और फर्जी दस्तावेज अपने आप मोबाइल में डाउनलोड न हो सकें। यह फीचर बंद रखने से मोबाइल डेटा और डिवाइस की सुरक्षा दोनों बनी रहती हैं।

एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि अज्ञात नंबरों से आने वाली कॉल्स को ब्लॉक या साइलेंस करना चाहिए ताकि संदिग्ध व्यक्तियों से संपर्क को रोका जा सके और किसी भी साइबर जालसाजी से बचा जा सके।

इसके अलावा उपयोगकर्ताओं को आईपी एड्रेस हाइड (Internet Location Privacy) विकल्प भी ऑन करने की सलाह दी गई है। इससे आपकी वास्तविक लोकेशन और नेटवर्क गतिविधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है और डिजिटल प्राइवेसी पहले से अधिक सुरक्षित रहती है।

राजस्थान पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं, इसलिए समय रहते सुरक्षा उपाय अपनाना ही सबसे बड़ा बचाव है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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