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कंगाल पाकिस्तान पर कर्ज का पहाड़! UAE ने 29 साल पुराना लोन मांगा वापस, अप्रैल में देना होगा अरबों डॉलर

मिडिल ईस्ट: में जारी तनाव और वैश्विक अस्थिरता के बीच पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलें और गहराती नजर आ रही हैं। पहले से ही भारी कर्ज और कमजोर अर्थव्यवस्था से जूझ रहे पाकिस्तान को अब अपने करीबी सहयोगी देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ओर से बड़ा झटका लगा है। UAE ने पाकिस्तान को दिए गए करीब 3.5 अरब डॉलर के कर्ज को तुरंत चुकाने का दबाव बनाया है, जिससे इस्लामाबाद की चिंता और बढ़ गई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कर्ज कोई नया नहीं, बल्कि लगभग 29 साल पुराना है, जिसे 1996-97 के दौरान लिया गया था। लंबे समय तक इसे टालने के बाद अब UAE ने इसे वापस लेने का फैसला किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और ऊर्जा व वित्तीय स्थिरता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने इस कर्ज को चुकाने की तैयारी शुरू कर दी है। अप्रैल 2026 के भीतर ही चरणबद्ध तरीके से पूरी राशि लौटाई जाएगी। 11 अप्रैल को लगभग 450 मिलियन डॉलर, 17 अप्रैल को 2 बिलियन डॉलर और 23 अप्रैल को 1 बिलियन डॉलर चुकाने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा 8 अप्रैल को 1.3 अरब डॉलर का यूरोबॉन्ड भुगतान भी करना है। यानी कुल मिलाकर इस महीने पाकिस्तान को लगभग 4.8 अरब डॉलर की भारी रकम चुकानी होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि की निकासी से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर गंभीर दबाव पड़ सकता है। पहले से ही सीमित रिजर्व के सहारे चल रही अर्थव्यवस्था के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है। हालांकि सरकार का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सच्चाई यह है कि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार काफी हद तक मित्र देशों जैसे चीन, सऊदी अरब और UAE की जमा राशि पर निर्भर करता है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी हाल ही में यह स्वीकार कर चुके हैं कि विदेशी मदद मांगना उनके लिए ‘शर्मिंदगी’ का कारण बनता है। इससे साफ जाहिर होता है कि देश की आर्थिक हालत कितनी नाजुक बनी हुई है।

कर्ज के बढ़ते बोझ के साथ-साथ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के अन्य संकेतक भी चिंताजनक हैं। चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में निर्यात में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं विदेशी निवेश में भी लगातार कमी आ रही है। इससे देश के राजस्व और विकास की संभावनाओं पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

स्थिति को और खराब करने वाला एक अन्य पहलू यह है कि UAE ने इस कर्ज पर ब्याज दर भी बढ़ा दी है। पहले जहां यह दर लगभग 3 प्रतिशत थी, उसे बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे पाकिस्तान के लिए कर्ज चुकाना और भी महंगा और कठिन हो गया है।

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का भी पाकिस्तान पर अप्रत्यक्ष असर पड़ रहा है। खाड़ी देशों की प्राथमिकता अब अपनी आर्थिक सुरक्षा बन गई है, जिसके चलते वे अपने निवेश और कर्ज को सुरक्षित करना चाहते हैं। इसी रणनीति के तहत UAE ने पाकिस्तान से कर्ज वापसी का दबाव बढ़ाया है।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर पाकिस्तान समय पर यह भुगतान नहीं कर पाता है, तो उसकी अंतरराष्ट्रीय साख पर भी असर पड़ सकता है। साथ ही भविष्य में नए कर्ज या निवेश मिलने की संभावनाएं भी कमजोर हो सकती हैं।

कुल मिलाकर, अप्रैल 2026 पाकिस्तान के लिए आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण महीना साबित होने जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस संकट से कैसे निपटती है और क्या वह अपने विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रख पाती है या नहीं।


निष्कर्ष:

पाकिस्तान इस समय आर्थिक मोर्चे पर एक बड़े संकट का सामना कर रहा है। UAE द्वारा कर्ज वापसी की मांग ने उसकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। यदि समय रहते मजबूत आर्थिक कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट और गहरा सकता है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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