नई दिल्ली/ज्योतिर्मठ: देश के प्रमुख धर्मगुरुओं में से एक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। यह धमकी एक ऑडियो मैसेज के जरिए दी गई, जिसमें उन्हें गैंगस्टर अतीक अहमद जैसा अंजाम भुगतने की चेतावनी दी गई। इस घटना के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में चिंता का माहौल है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस धमकी को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कहा है कि वे ऐसे डराने-धमकाने वाले संदेशों से घबराने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष धर्म और गौ रक्षा के लिए है और वे इसे हर हाल में जारी रखेंगे।
मिली जानकारी के अनुसार, शंकराचार्य को एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा ऑडियो मैसेज भेजा गया, जिसमें सीधे तौर पर जान से मारने की धमकी दी गई। मैसेज में कहा गया कि उनका हाल भी अतीक अहमद जैसा कर दिया जाएगा। इस तरह की भाषा ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह धमकी किसने दी और इसके पीछे क्या मकसद है। सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच में जुट गई हैं।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा,
“मैं ऐसी धमकियों से डरने वाला नहीं हूं। यदि हिंदू धर्म और गौ रक्षा जैसे पवित्र कार्यों के लिए मेरी जान भी चली जाए, तो यह मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं होगी।”
उन्होंने इसे “धर्मयुद्ध” बताते हुए कहा कि उनका संघर्ष जारी रहेगा, चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि इस लड़ाई में उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि देश के कई बड़े धर्मगुरु या धर्माचार्य इस मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं।
उनके अनुसार, समाज में अब यह पहचानना जरूरी हो गया है कि कौन “असली” और कौन “नकली” हिंदू है। यह बयान उनके विचारों को और स्पष्ट करता है कि वे इस मुद्दे को सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि व्यापक धार्मिक दृष्टिकोण से देख रहे हैं।
इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध जैसे हालातों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दुनिया में कुछ शक्तियां नियमों को तोड़कर संघर्ष और युद्ध को बढ़ावा दे रही हैं।
उन्होंने कहा,
“इतिहास में भी कई युद्ध हुए हैं, लेकिन हर स्थिति का विश्लेषण जरूरी है, ताकि यह समझा जा सके कि कौन अपने स्वार्थ के लिए हालात बिगाड़ रहा है।”
इस धमकी के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर सुरक्षा व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच जारी है।
धार्मिक नेताओं को मिल रही इस तरह की धमकियां सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक माहौल पर सवाल खड़े करती हैं। यह जरूरी है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई हो और दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मिली धमकी न केवल एक व्यक्ति विशेष पर हमला है, बल्कि यह धार्मिक और सामाजिक ताने-बाने के लिए भी चुनौती है। उनके बेखौफ बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने सिद्धांतों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है।
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