राजस्थान: की राजधानी जयपुर में एक बड़े ई-कॉमर्स फ्रॉड का खुलासा हुआ है, जिसने ऑनलाइन शॉपिंग सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में शातिर आरोपियों ने मशहूर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart का दुरुपयोग करते हुए महंगे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स मंगाए और बाद में नकली सामान पैक कर उन्हें वापस लौटा दिया। इस सुनियोजित ठगी से एक स्थानीय व्यापारी को मात्र चार महीनों में करीब 1.79 करोड़ रुपए का भारी नुकसान उठाना पड़ा।
पीड़ित व्यापारी चंद्र प्रकाश सिंह (53), जो जयपुर के तीजा नगर क्षेत्र के निवासी हैं, ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि उनका अजयराजपुरा-कलवाड़ा स्थित वेयरहाउस से ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिक्री होती है। इस वेयरहाउस के माध्यम से मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट जैसे महंगे गैजेट्स ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचे जाते हैं।
आरोपियों ने नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच करीब 52 अलग-अलग फर्जी अकाउंट्स बनाकर लगातार महंगे प्रोडक्ट्स ऑर्डर किए। इन ऑर्डर्स में खासतौर पर Apple, Samsung और Lenovo जैसे ब्रांड्स के प्रीमियम प्रोडक्ट्स शामिल थे।
आरोपियों का तरीका बेहद चालाकी भरा था। वे पहले ओरिजिनल प्रोडक्ट्स मंगवाते, फिर डिलीवरी मिलने के बाद पैकेज खोलकर असली सामान निकाल लेते। इसके बाद उसी बॉक्स में नकली या कम कीमत का सामान पैक कर रिटर्न रिक्वेस्ट डाल देते।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की रिटर्न पॉलिसी का फायदा उठाते हुए यह प्रक्रिया बार-बार दोहराई गई। चूंकि पैकेजिंग ऊपर से सामान्य दिखती थी, इसलिए शुरुआती स्तर पर इस धोखाधड़ी का पता नहीं चल सका।
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब वेयरहाउस की नियमित ऑडिट रिपोर्ट तैयार की गई। रिपोर्ट में सामने आया कि बड़ी संख्या में रिटर्न किए गए प्रोडक्ट्स नकली या बदले हुए थे।
व्यापारी ने बताया कि ऑडिट के दौरान जब लगातार नुकसान सामने आया, तो उन्होंने अपने आर्थिक सलाहकार से राय लेकर मामले की जांच करवाई। इसके बाद पूरा मामला सामने आने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
मामले की जांच कर रही राजस्थान पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। सेज थाना पुलिस के अनुसार, तकनीकी टीम की मदद से फर्जी अकाउंट्स की लोकेशन, आईपी एड्रेस, डिलीवरी एड्रेस और पैकेजिंग चेन की गहराई से जांच की जा रही है।
थाना प्रभारी उदय सिंह शेखावत ने बताया कि यह फ्रॉड किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक संगठित साइबर गिरोह का काम हो सकता है, जो देश के किसी भी हिस्से से ऑपरेट कर रहा हो।
पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय हो सकता है और अलग-अलग शहरों में इसी तरह की वारदातें कर चुका हो सकता है। ऐसे में इस मामले को बड़े साइबर क्राइम नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने रिटर्न सिस्टम को और अधिक सुरक्षित बनाने की जरूरत है, ताकि इस तरह के फ्रॉड को रोका जा सके।
यह मामला ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स और विक्रेताओं दोनों के लिए एक बड़ा अलर्ट है। जहां एक ओर ग्राहक सुविधाओं का लाभ उठाते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इन्हीं सुविधाओं का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर ठगी को अंजाम दे रहे हैं।
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