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1200 से 22,000 तक ‘लीगल पावर’: BCR चुनाव में महिलाओं की एंट्री से बदलेगा गेम, 5 सीटों पर 57 दावेदार

राजस्थान: में वकालत के पेशे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी अब एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच चुकी है। Bar Council of Rajasthan (BCR) के चुनाव इस बार सिर्फ एक सामान्य चुनाव नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की बड़ी तस्वीर पेश करने जा रहे हैं।

करीब 8 साल बाद 22 अप्रैल को होने वाले इन चुनावों में महिला वकीलों की मजबूत मौजूदगी और पहली बार दिया गया आरक्षण इसे खास बना रहा है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले 33 वर्षों में महिला अधिवक्ताओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

1200 से 22 हजार तक का सफर: एक क्रांति

साल 1993 में राजस्थान में केवल करीब 1200 महिला वकील रजिस्टर्ड थीं। उस दौर में वकालत को पुरुष-प्रधान पेशा माना जाता था। लेकिन आज यह आंकड़ा 22 हजार के करीब पहुंच चुका है।

यह लगभग 18 गुना वृद्धि दर्शाता है कि कैसे महिलाओं ने न्यायिक क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। इस बदलाव ने न सिर्फ पेशे की तस्वीर बदली है, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में भी महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाया है।

इस सफर में सुनीता सत्यार्थी जैसी अग्रणी महिला अधिवक्ताओं की भूमिका अहम रही, जिन्होंने उस समय इस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई जब महिलाओं की संख्या बेहद सीमित थी।

पहली बार आरक्षण: 5 सीटों पर 57 महिला प्रत्याशी

इस बार BCR चुनाव का सबसे बड़ा आकर्षण महिलाओं के लिए आरक्षण है। 25 सदस्यीय परिषद में से 23 सीटों पर सीधे चुनाव हो रहे हैं, जिनमें से 5 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं।

इन 5 सीटों पर 57 महिला प्रत्याशी मैदान में हैं। यानी एक सीट पर औसतन 11 उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा।

यह संख्या दर्शाती है कि महिलाएं अब सिर्फ भागीदारी ही नहीं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं।

84 हजार वकील करेंगे मतदान

इस चुनाव में प्रदेशभर के 84,247 अधिवक्ता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इतने बड़े वोटर बेस के साथ यह चुनाव राज्य के सबसे महत्वपूर्ण पेशेवर चुनावों में से एक माना जा रहा है।

खास बात यह है कि इस बार चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और खास वोटिंग सिस्टम

चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की देखरेख में पूरी प्रक्रिया हो रही है।

राजस्थान के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जिसमें जे. आर. मिड्ढा और मनोज गर्ग जैसे वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी शामिल हैं।

इस बार चुनाव ‘Single Transferable Vote’ (एकल हस्तांतरणीय मत) प्रणाली से होगा। इसमें मतदाता एक ही वोट डालता है, लेकिन उम्मीदवारों को वरीयता क्रम में रैंक करता है। यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि हर वोट का अधिकतम प्रभाव पड़े।

महिलाओं की बढ़ती ताकत का असर

विशेषज्ञों का मानना है कि महिला वकीलों की बढ़ती संख्या और उनकी सक्रिय भागीदारी चुनाव के परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकती है।

अब महिलाएं केवल संख्या में ही नहीं, बल्कि प्रभाव और नेतृत्व में भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इससे बार काउंसिल की नीतियों और फैसलों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

राजनीतिक और सामाजिक महत्व

यह चुनाव केवल एक पेशेवर संस्था का चुनाव नहीं है, बल्कि समाज में बदलते लैंगिक संतुलन का भी प्रतीक है।

महिला आरक्षण और उनकी बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि आने वाले समय में न्यायिक और कानूनी संस्थानों में महिलाओं की भूमिका और भी मजबूत होगी।


निष्कर्ष:

Bar Council of Rajasthan के इस चुनाव ने एक बात स्पष्ट कर दी है—महिलाएं अब सिर्फ सहभागिता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नेतृत्व के केंद्र में आ चुकी हैं। 1200 से 22 हजार तक का सफर एक सामाजिक परिवर्तन की कहानी है, जो इस चुनाव के जरिए नई दिशा तय कर सकता है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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