जयपुर: स्थित राजस्थान यूनिवर्सिटी में आज होने वाले 35वें दीक्षांत समारोह से पहले ही माहौल तनावपूर्ण हो गया है। जहां एक ओर यह समारोह छात्रों के लिए खुशी और उपलब्धि का अवसर होना चाहिए था, वहीं दूसरी ओर पीएचडी छात्रों के विरोध ने इस कार्यक्रम को विवादों में ला खड़ा किया है।
छात्रों का आरोप है कि उन्हें मंच से डिग्री नहीं दी जा रही है, जिसे वे अपनी मेहनत और उपलब्धि का अपमान मान रहे हैं। इस मुद्दे ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल और उच्च शिक्षा मंत्री के शामिल होने की तैयारी चल रही है।
छात्र नेता रामसिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सैकड़ों पीएचडी छात्रों को मंच से डिग्री न देना गलत और अस्वीकार्य है। उनका कहना है कि पीएचडी एक लंबी और कठिन प्रक्रिया होती है, जिसमें वर्षों की मेहनत और रिसर्च शामिल होती है।
ऐसे में यदि उन्हें मुख्य अतिथियों के हाथों सम्मान नहीं मिलता, तो यह उनकी डिग्री की गरिमा को कम करता है। छात्रों का कहना है कि वे इस फैसले को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।
आज के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन की मौजूदगी इसे और अधिक महत्वपूर्ण बना देती है। इसके अलावा, राज्यपाल और उच्च शिक्षा मंत्री भी इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं।
ऐसे में प्रशासन पर यह दबाव बढ़ गया है कि वह इस विवाद को जल्द सुलझाए, ताकि समारोह बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।
यह पहली बार नहीं है जब किसी विश्वविद्यालय में इस तरह का विवाद सामने आया हो। हाल ही में हरदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में भी इसी तरह की स्थिति बनी थी, जहां छात्रों को मंच से डिग्री नहीं दी जा रही थी।
विरोध इतना बढ़ गया था कि एक छात्रा ने मंच पर ही डिप्टी सीएम के सामने नाराजगी जाहिर की थी। अंततः प्रशासन को झुकना पड़ा और सभी छात्रों को मंच पर बुलाकर सम्मानित करना पड़ा।
अब राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्र भी उसी तरह की मांग कर रहे हैं और अपने अधिकार के लिए अड़े हुए हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर उसे समारोह को व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करना है, वहीं दूसरी ओर छात्रों की नाराजगी को भी दूर करना है।
यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह विवाद समारोह के दौरान बड़े हंगामे में बदल सकता है।
इस पूरे विवाद के बीच उपराष्ट्रपति का हालिया बयान भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने कहा था कि डिग्री केवल पढ़ाई का अंत नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों की शुरुआत है।
उन्होंने युवाओं से समाज और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने और सेवा भाव से काम करने की अपील की थी। हालांकि, मौजूदा विवाद यह दिखाता है कि छात्रों के लिए डिग्री का सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अब सभी की नजरें विश्वविद्यालय प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस स्थिति को कैसे संभालता है। क्या छात्रों की मांग मान ली जाएगी या फिर कार्यक्रम पूर्व निर्धारित तरीके से ही होगा—यह देखना अहम होगा।
राजस्थान यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह इस बार केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छात्रों के सम्मान और अधिकार की लड़ाई का मंच बन गया है। यदि प्रशासन और छात्र आपसी संवाद से समाधान निकालते हैं, तो यह विवाद शांत हो सकता है, अन्यथा यह बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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