राजस्थान: की राजधानी जयपुर के मानसरोवर स्थित वीटी ग्राउंड में चल रही शिव महापुराण कथा में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। प्रसिद्ध कथावाचक प्रदीप मिश्रा की कथा के पांचवें दिन भी सुबह से ही पंडाल में भारी भीड़ देखने को मिली। दूर-दूर से लोग कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं और जैसे-जैसे दिन बढ़ता है, श्रद्धालुओं की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है।
कथा के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा पास के जरिए एंट्री को लेकर हो रहे विवाद की रही, जिस पर कथावाचक ने खुलकर अपनी बात रखी और एक सशक्त संदेश दिया।
कथा के दौरान प्रदीप मिश्रा ने स्पष्ट कहा कि कथा सुनने आए लोगों को बैठने के लिए किसी विशेष स्थान या सुविधा की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “आप कथा सुनने आए हो, जहां जगह मिले बैठ जाया करो। कुर्सी, सोफा या जमीन—हर जगह से वही कथा सुनाई देगी।”
उन्होंने सरल उदाहरण देते हुए कहा कि कुर्सी पर बैठने में गिरने का डर रहता है, जबकि जमीन पर बैठने में कोई डर नहीं होता। इसी तरह कुर्सी छीनी जा सकती है, लेकिन जमीन कोई नहीं छीन सकता।
उनका यह संदेश उन लोगों के लिए था जो पास के जरिए आगे बैठने को लेकर विवाद कर रहे थे।
कथा के दौरान उन्होंने आध्यात्मिक जीवन पर भी गहरी बात कही। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग बाहरी दिखावे पर ज्यादा ध्यान देते हैं—लंबे बाल, तिलक, माला—लेकिन असली परिवर्तन भीतर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान को रिझाने के लिए बाहरी रूप नहीं, बल्कि आंतरिक भक्ति और सच्चा भाव जरूरी है।
उन्होंने बताया कि आज लोगों के पास धन-संपत्ति की कमी नहीं है, लेकिन मन की शांति की कमी जरूर है।
कथावाचक ने समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए नारी सम्मान पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में ऊंचा स्थान पाने के लिए घर की महिलाओं का सम्मान करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव स्वयं अपनी पत्नी को उच्च स्थान देते हैं और शिव पुराण में नारी के महत्व को विशेष रूप से बताया गया है।
उनका कहना था कि जो व्यक्ति अपने घर की स्त्री का सम्मान करता है, वही जीवन में सच्ची उन्नति कर सकता है।
कथा के समापन को लेकर भी अहम जानकारी दी गई। प्रदीप मिश्रा ने बताया कि गुरुवार को कथा का अंतिम दिन होगा और उस दिन कथा के समय में बदलाव किया गया है।
समापन दिवस पर कथा सुबह 8 बजे से 11 बजे तक आयोजित की जाएगी। इससे पहले बुधवार को कथा में महाशिवरात्रि से जुड़े प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।
पंडाल में बढ़ती भीड़ को देखते हुए आयोजकों द्वारा व्यवस्थाएं की जा रही हैं, लेकिन फिर भी पास को लेकर लोगों में असंतोष देखने को मिला।
हालांकि कथावाचक के संदेश के बाद कई श्रद्धालुओं ने इसे सकारात्मक रूप से लिया और जहां जगह मिली, वहीं बैठकर कथा का आनंद लिया।
पूरे पंडाल में भक्ति और आस्था का माहौल बना हुआ है। भजन, प्रवचन और धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालु आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं।
जयपुर में आयोजित यह कथा न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि समाज को जोड़ने और सकारात्मक संदेश देने का एक माध्यम भी बन रही है।
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