मध्य-पूर्व: में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता से ठीक पहले बड़ा झटका लगा है। ईरान ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली बैठक में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे क्षेत्रीय हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं।
इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो “ईरान को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा।” ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
ईरानी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, ईरान ने अमेरिका की “अवास्तविक मांगों” और “लगातार बदलते रुख” को वार्ता से हटने की मुख्य वजह बताया है। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी गतिविधियों और नौसैनिक नाकाबंदी को भी ईरान ने गंभीर आपत्ति का कारण बताया।
ईरान का कहना है कि अमेरिका की शर्तें एकतरफा और असंतुलित हैं, जो उसकी संप्रभुता और रणनीतिक हितों के खिलाफ हैं। इसी वजह से उसने इस बैठक में भाग लेने से इनकार कर दिया।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका ने एक “निष्पक्ष और उचित समझौता” पेश किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने इसे स्वीकार नहीं किया, तो उसके महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर—जैसे पुल और बिजली संयंत्र—नष्ट कर दिए जाएंगे।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि वे अब भी शांति समझौता कराने में सक्षम हैं, लेकिन इसके लिए ईरान को नरमी दिखानी होगी।
वार्ता भले ही अनिश्चितता में हो, लेकिन अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल जेडी वेंस के नेतृत्व में इस्लामाबाद पहुंच चुका है। इस टीम में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।
इस संभावित बैठक को देखते हुए पाकिस्तान ने राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। हालांकि ईरान के इनकार के बाद इस वार्ता के रद्द होने की संभावना बढ़ गई है।

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी माइनस्वीपर जहाज को चेतावनी देने के बाद वह 15 मिनट के भीतर पीछे हट गया।
गालिबाफ ने इसे ईरान की रणनीतिक ताकत का उदाहरण बताते हुए कहा कि यदि कोई भी देश युद्धविराम का उल्लंघन करेगा, तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि किसी भी देश को उसके परमाणु अधिकारों से वंचित करने का अधिकार अमेरिका को नहीं है।
उन्होंने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगा, चाहे इसके लिए उसे अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना ही क्यों न करना पड़े।
इस घटनाक्रम का असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व और वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है। पहले से ही इज़राइल के साथ तनाव झेल रहे ईरान के इस फैसले से क्षेत्र में युद्ध की आशंका और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो हालात सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकते हैं, जिसका असर तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
ईरान द्वारा वार्ता से पीछे हटना और अमेरिका की सख्त चेतावनी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। जहां एक ओर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध की आशंका भी बढ़ती जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों देश बातचीत की मेज पर लौटते हैं या टकराव और बढ़ता है।
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