22 अप्रैल 2025: को हुए पहलगाम के बायसरन घाटी आतंकी हमले की पहली बरसी पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर कड़ी कर दी गई है। प्रशासन और सुरक्षाबलों ने पूरे कश्मीर संभाग में हाई अलर्ट जारी करते हुए संवेदनशील इलाकों से लेकर पर्यटन स्थलों और नियंत्रण रेखा (LOC) तक सुरक्षा का बहु-स्तरीय घेरा तैयार किया है।
Baisaran Valley में हुए इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। बरसी के मद्देनजर किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक रणनीति अपनाई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बीते कुछ दिनों में वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने कई दौर की बैठकें कर एक विस्तृत ग्राउंड सिक्योरिटी प्लान तैयार किया है।
प्रशासन ने प्रदेश भर में धार्मिक स्थलों, पर्यटन केंद्रों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी है। विशेष ध्यान उन पर्यटन स्थलों पर दिया जा रहा है जिन्हें हमले के बाद सुरक्षा कारणों से बंद किया गया था। जानकारी के मुताबिक, करीब 48 पर्यटन स्थलों को अस्थायी रूप से बंद किया गया था, जिनमें से अब लगभग 42 को फिर से खोल दिया गया है, जबकि बाकी जगहों पर अभी भी सख्त निगरानी जारी है।
राजधानी Srinagar के प्रमुख और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। Lal Chowk, रेजीडेंसी रोड और बुलेवार्ड रोड जैसे क्षेत्रों में जवानों की मौजूदगी बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही लगातार तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

बायसरन घाटी और आसपास के पहाड़ी इलाकों में छोटी-छोटी टुकड़ियों में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। हर टीम में 10 से 15 जवान शामिल हैं, जो ऊपरी क्षेत्रों से होने वाली संभावित आतंकी घुसपैठ पर नजर बनाए हुए हैं। यह रणनीति खास तौर पर उन इलाकों में अपनाई गई है जहां से पहले भी आतंकी मूवमेंट की आशंका रही है।
Line of Control और उससे सटे आंतरिक इलाकों में भी तलाशी अभियान तेज कर दिए गए हैं। सीमा पार से सक्रिय आतंकी लॉन्चिंग पैड्स को ध्यान में रखते हुए एंटी-इनफिल्ट्रेशन ग्रिड और काउंटर-इंसरजेंसी ग्रिड की लगातार समीक्षा की जा रही है। हाल ही में उत्तरी कमान के सेना कमांडर ने भी क्षेत्र का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया।
पहलगाम हमले के बाद से सुरक्षाबलों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों को तेज कर दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में 46 आतंकवादियों को मार गिराया गया है। इनमें हमले से जुड़े कई आतंकवादी भी शामिल थे।
किश्तवाड़, उधमपुर और कठुआ जिलों में चलाए गए ऑपरेशनों में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। फरवरी 2026 में किश्तवाड़ के छात्रू इलाके में Jaish-e-Mohammed के आतंकियों को मार गिराया गया, जिसमें कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल था।
इसके अलावा, उधमपुर और कठुआ में भी कई बड़े ऑपरेशन किए गए, जिनमें आतंकियों के ठिकानों को नष्ट किया गया। सबसे बड़ी सफलता जुलाई 2025 में दाछिगाम क्षेत्र में चलाए गए एक ऑपरेशन के दौरान मिली, जहां पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों को मार गिराया गया।
ये आतंकी Lashkar-e-Taiba से जुड़े संगठन TRF (द रेजिस्टेंस फ्रंट) के सदस्य थे। मारे गए आतंकियों में सुलेमान शाह, जिब्रान और हमजा अफगानी शामिल थे।
भारतीय सेना ने इस बरसी से पहले एक सख्त संदेश जारी किया है। सेना के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि भारत किसी भी आतंकी हरकत को नहीं भूलेगा और जो भी सीमाएं लांघेगा, उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। यह संदेश साफ तौर पर आतंकियों और उनके समर्थकों को चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
पहलगाम हमले की पहली बरसी पर कश्मीर में सुरक्षा का अभूतपूर्व इंतजाम यह दर्शाता है कि सुरक्षा एजेंसियां किसी भी खतरे को हल्के में लेने के लिए तैयार नहीं हैं। एक साल में आतंकियों के खिलाफ मिली बड़ी सफलताओं के बावजूद सतर्कता बनाए रखना जरूरी है। यह न केवल सुरक्षा बल्कि आम नागरिकों और पर्यटकों के विश्वास को बनाए रखने के लिए भी अहम है।
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