गुजरात: में हुए स्थानीय निकाय चुनाव 2026 के नतीजों ने एक बार फिर राज्य की सियासत का रुख साफ कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 15 नगर निगमों समेत अधिकांश निकायों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अपने पारंपरिक गढ़ों में भी हार का सामना करना पड़ा, जबकि आम आदमी पार्टी ने खुद को दूसरे नंबर की पार्टी बताते हुए नई राजनीतिक जमीन बनाने का दावा किया है।
राज्य में 15 नगर निगम, 84 नगरपालिकाएं, 34 जिला पंचायत और 260 तालुका पंचायतों की कुल लगभग 9,200 सीटों पर चुनाव हुए थे। इन चुनावों में 4.18 करोड़ से अधिक मतदाता पात्र थे। मंगलवार को आए नतीजों में बीजेपी ने स्पष्ट बढ़त बनाते हुए खुद को नंबर वन पार्टी साबित किया।
निर्वाचन आयोग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 15 नगर निगमों की 1044 सीटों में से घोषित 493 सीटों में बीजेपी ने 467 सीटें जीत लीं, जबकि कांग्रेस को मात्र 22 सीटें मिलीं। अन्य दलों और निर्दलीयों के खाते में 4 सीटें गईं।
बीजेपी ने कच्छ जिले के गांधीधाम नगर निगम और भुज नगरपालिका में जीत दर्ज कर अपनी पकड़ और मजबूत की। अहमदाबाद नगर निगम में भी पार्टी ने मजबूत प्रदर्शन किया।
मतदान प्रतिशत की बात करें तो शहरी क्षेत्रों में सबसे कम मतदान गांधीधाम में 46.03% और सबसे ज्यादा वलसाड जिले के वापी में 72.29% रहा। अहमदाबाद में 51.81% मतदान दर्ज हुआ।
ग्रामीण निकायों में आदिवासी बहुल नर्मदा जिला में सबसे अधिक 84.49% मतदान हुआ, जो राज्य में सबसे ज्यादा रहा। वहीं पोरबंदर जिला पंचायत में सबसे कम 50.80% मतदान दर्ज किया गया।

आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि उसने 247 सीटें जीतकर कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया है और अब वह राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। पार्टी के अनुसार, कांग्रेस को केवल 116 सीटों पर जीत मिली है, जिससे वह तीसरे स्थान पर खिसक गई है।
हालांकि, आधिकारिक तौर पर सभी सीटों के नतीजे आने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
भरूच जिले के पालेज सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा, जहां कांग्रेस उम्मीदवार मोहसिन पठान ने महज 1 वोट से जीत दर्ज की। इस तरह के करीबी मुकाबलों ने चुनावी रोमांच को और बढ़ा दिया।
वडोदरा नगर निगम चुनाव में कई दिलचस्प नतीजे सामने आए। बीजेपी के बागी पार्षद आशीष जोशी ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत लिया। वहीं पूर्व विधायक मधु श्रीवास्तव की बेटी दीपा श्रीवास्तव ने भी जीत दर्ज की, जबकि परिवार के अन्य सदस्य को हार का सामना करना पड़ा।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि इस बार पार्टी ने पिछले चुनावों की तुलना में और बेहतर प्रदर्शन किया है। पार्टी का मानना है कि गुजरात की जनता ने विकास, स्थिरता और मजबूत नेतृत्व के नाम पर एक बार फिर भरोसा जताया है।
इन चुनाव नतीजों ने विपक्षी दलों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। खासकर कांग्रेस, जो कभी गुजरात की प्रमुख पार्टी हुआ करती थी, अब लगातार कमजोर होती नजर आ रही है। वहीं AAP के बढ़ते दावे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बना सकते हैं।
गुजरात निकाय चुनाव 2026 के नतीजे साफ संकेत देते हैं कि राज्य में बीजेपी का दबदबा बरकरार है। कांग्रेस की स्थिति कमजोर होती जा रही है, जबकि AAP नई चुनौती बनकर उभर रही है। आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए ये परिणाम राजनीतिक दलों के लिए संकेत और रणनीति तय करने का आधार बनेंगे।
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