राजस्थान: माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के 12वीं के नतीजों ने इस बार एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने लाई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। Jaipur के रहने वाले सोनू मेहरा ने 99.80% अंक हासिल कर साइंस स्ट्रीम में पूरे राजस्थान में टॉप किया है। खास बात यह है कि सोनू एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया।
सोनू के पिता विनोद मेहरा इमारतों में पेंटिंग का काम करते हैं और रोजाना मजदूरी कर परिवार का गुजारा करते हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।
सोनू ने 7वीं कक्षा तक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई की, लेकिन आर्थिक कारणों से 8वीं के बाद सरकारी स्कूल में दाखिला लेना पड़ा। यहीं से उनकी असली मेहनत शुरू हुई, जिसने आज उन्हें राज्य का टॉपर बना दिया।
सोनू का सपना है कि वह आगे चलकर IAS अधिकारी बने और समाज के लिए कुछ बड़ा करे। उनका कहना है कि कठिन परिस्थितियों ने उन्हें और मजबूत बनाया है।
साइंस स्ट्रीम में ही Varsha Sharma ने 99.20% अंक हासिल किए। उन्होंने केमिस्ट्री और मैथ्स में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए।
वहीं आर्ट्स स्ट्रीम में Navya Meena ने 99.60% अंक लाकर टॉप किया। नव्या एक सरकारी स्कूल की छात्रा हैं, जो Kishangarh-Renwal क्षेत्र से आती हैं।
कॉमर्स स्ट्रीम में Ayush Agarwal और Piyush Agarwal नाम के जुड़वा भाइयों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए क्रमशः 97% और 96.4% अंक हासिल किए। दोनों का सपना CA बनने का है।
इस साल राजस्थान बोर्ड का रिजल्ट भी काफी बेहतर रहा है—
यह पहली बार है जब बोर्ड ने मार्च महीने में ही 12वीं का रिजल्ट जारी किया है। इससे पहले आमतौर पर परिणाम मई या जून में आते थे।
Jaipur जिले में इस बार 1 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था।
हालांकि पिछले साल के मुकाबले जयपुर का प्रदर्शन रैंकिंग में थोड़ा पीछे रहा था, लेकिन इस बार परिणामों में सुधार देखने को मिला है।
रिजल्ट जारी होते ही स्कूलों और घरों में खुशी का माहौल देखने को मिला। कई जगह छात्रों ने डांस कर जश्न मनाया। “फॉर्च्युनर” जैसे गानों पर स्टूडेंट्स थिरकते नजर आए और अपनी सफलता का जश्न मनाया।
राजस्थान के शिक्षा मंत्री Madan Lal Dilawar ने भी टॉपर्स को फोन कर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
Jaipur के सोनू मेहरा की कहानी यह साबित करती है कि सफलता के लिए संसाधन नहीं, बल्कि मेहनत और लगन जरूरी होती है। दिहाड़ी मजदूर का बेटा आज पूरे राजस्थान का टॉपर बना है, जो लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है। यह परिणाम न केवल छात्रों की मेहनत का प्रतीक है, बल्कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार का भी संकेत देता है।
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