राजस्थान: के दौसा जिले में पुलिस ने 25 साल पुराने एक सनसनीखेज लूट कांड का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला वर्ष 2001 का है, जब जयपुर से अलीगढ़ जा रही एक रोडवेज बस को हथियारबंद बदमाशों ने निशाना बनाया था। अब इतने वर्षों बाद आरोपी की गिरफ्तारी ने पुलिस की बड़ी सफलता के रूप में सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, 23 जुलाई 2001 को जयपुर से अलीगढ़ जा रही रोडवेज बस में करीब 33 यात्री सवार थे। रास्ते में बदमाशों ने बस को रोक लिया और ड्राइवर को कट्टे की नोक पर धमकाकर हाईवे से हटाकर सुनसान इलाके में ले गए। इसके बाद यात्रियों और बस के परिचालक से नगदी और जेवरात लूट लिए गए। घटना ने उस समय इलाके में दहशत फैला दी थी।
वारदात के बाद आरोपी फरार हो गया था और पुलिस की गिरफ्त से लगातार बचता रहा। कोर्ट ने उसे उद्घोषित अपराधी घोषित कर दिया था, लेकिन उसके ठिकाने का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस समय-समय पर आरोपी की तलाश करती रही, लेकिन हर बार वह चकमा देने में सफल रहा।
हाल ही में राजस्थान पुलिस की विशेष टीम ने इस पुराने केस को फिर से खंगालना शुरू किया। थाना प्रभारी भगवान सहाय और साइबर सेल प्रभारी प्रेमनारायण के नेतृत्व में टीम ने तकनीकी विश्लेषण और मुखबिरों की सूचना के आधार पर आरोपी की लोकेशन ट्रेस की।
पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी बुलंदशहर जिले के सराय घासी इलाके में छिपा हुआ है। इसके बाद टीम ने यूपी पहुंचकर योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की और आरोपी गंभीर सिंह यादव को दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे दौसा लाया गया, जहां उससे पूछताछ जारी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी पिछले 25 वर्षों से लगातार अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग जगहों पर रह रहा था। वह मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके जीवन यापन कर रहा था, ताकि किसी को उस पर शक न हो। हालांकि तकनीकी निगरानी और स्थानीय सूत्रों की मदद से आखिरकार पुलिस उसे पकड़ने में सफल रही।
इस कार्रवाई में हेड कांस्टेबल सुनील कुमार, कांस्टेबल यशपाल और कुम्हेर सिंह की अहम भूमिका रही। पुलिस टीम की इस सफलता की सराहना उच्च अधिकारियों द्वारा भी की जा रही है।
पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि उस लूट कांड में और कौन-कौन शामिल था और क्या इस गिरोह ने अन्य राज्यों में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया था। संभावना जताई जा रही है कि इस गिरोह के अन्य सदस्य भी जल्द ही पुलिस के शिकंजे में आ सकते हैं।
इस गिरफ्तारी ने यह भी साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे कितना भी चालाक क्यों न हो, कानून के हाथ लंबे होते हैं और देर-सवेर वह गिरफ्त में आ ही जाता है। 25 साल बाद न्याय की इस दिशा में उठाया गया कदम पीड़ितों के लिए भी एक बड़ी राहत माना जा रहा है।
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