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जयपुर हिट एंड रन केस में बड़ा मोड़: 16 लोगों को कुचलने वाले ऑडी ड्राइवर को मिली जमानत

जयपुर: में 9 जनवरी को हुए दर्दनाक हिट एंड रन केस में एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। मानसरोवर इलाके में तेज रफ्तार ऑडी कार से 16 लोगों को कुचलने के आरोपी दिनेश रणवा को राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। इस फैसले के बाद न केवल पीड़ित परिवारों में नाराजगी देखी जा रही है, बल्कि पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

हाईकोर्ट ने आरोपी को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके और 25-25 हजार रुपए के दो जमानतदारों के आधार पर जमानत दी है। साथ ही यह भी शर्त रखी गई है कि आरोपी हर सुनवाई पर अदालत में उपस्थित रहेगा।

वकील के तर्क: ‘झूठा फंसाया गया’

आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि दिनेश रणवा को इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस यह साबित करने में नाकाम रही है कि हादसे के वक्त गाड़ी वही चला रहा था। न तो कोई पुख्ता सीसीटीवी फुटेज पेश किया गया और न ही शिनाख्त परेड करवाई गई।

वकील ने यह भी कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह लंबे समय से जेल में है, जबकि ट्रायल पूरा होने में अभी काफी समय लग सकता है।

सरकारी पक्ष का विरोध

सरकारी वकील ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि हादसे के समय कार दिनेश रणवा के कब्जे में थी और वह तेज गति से वाहन चला रहा था। हादसे के बाद वह करीब 10 दिन तक फरार भी रहा, जो उसके खिलाफ एक मजबूत संकेत है।

इसके अलावा, मौके से गिरफ्तार अन्य आरोपियों ने भी सीधे तौर पर दिनेश रणवा का नाम लिया था। बावजूद इसके कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद जमानत मंजूर कर ली।

क्या था पूरा मामला?

यह हादसा 9 जनवरी की रात करीब 9:15 बजे जयपुर के सांगानेर इलाके में खरबास सर्किल के पास हुआ था। तेज रफ्तार ऑडी कार पहले डिवाइडर से टकराई और फिर करीब 200 मीटर तक सड़क किनारे लगे ठेलों और दुकानों को रौंदते हुए कई लोगों को कुचल दिया।

कार की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि अंत में वह एक पेड़ से टकराकर रुकी, और टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पेड़ तक उखड़ गया।

इस हादसे में भीलवाड़ा निवासी रमेश की मौत हो गई थी, जो जयपुर में मजदूरी कर अपने परिवार का सहारा था। वहीं, 14 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

पुलिस जांच पर उठे सवाल

इस केस में पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि आरोपी की शिनाख्त परेड तक नहीं करवाई गई। साथ ही, कोई स्पष्ट वीडियो सबूत भी कोर्ट में पेश नहीं किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गंभीर लापरवाही न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है और इससे आरोपियों को फायदा मिलता है।

पीड़ित परिवारों में आक्रोश

जमानत की खबर सामने आने के बाद पीड़ित परिवारों में नाराजगी का माहौल है। उनका कहना है कि अभी तक उन्हें न्याय नहीं मिला और आरोपी को राहत मिलना उनके जख्मों को और गहरा कर रहा है।

परिवारों ने सरकार और न्याय व्यवस्था से मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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