राजस्थान: की राजधानी जयपुर में पत्रकारों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। गुरुवार को इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (Indian Federation of Working Journalists) के बैनर तले चल रहा धरना 19वें दिन भी जारी रहा। शहीद स्मारक पर सैकड़ों पत्रकारों ने एकजुट होकर राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और ‘हल्ला बोल’ के नारे लगाए।
यह आंदोलन प्रदेश में पत्रकारों के खिलाफ कथित प्रशासनिक कार्रवाई, झूठे मुकदमों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हो रहे हमलों के विरोध में किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हाल ही में एक वरिष्ठ पत्रकार की आजीविका पर बुलडोजर कार्रवाई की गई, जो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला है।
धरने का मुख्य केंद्र शहीद स्मारक बना हुआ है, जहां प्रदेशभर से आए पत्रकार एकत्रित हुए। यहां से उन्होंने सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी गर्म रहा और कई बार नारेबाजी तेज हो गई।
पत्रकारों का कहना है कि वे केवल अपने अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर मीडिया को दबाने की कोशिश की जा रही है।
धरने के बाद बड़ी संख्या में पत्रकार मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने के लिए मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने लगे। लेकिन शहीद स्मारक के बाहर ही पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक लिया।
जब प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए कई पत्रकारों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्हें शिप्रा पथ थाना ले जाया गया, जहां उनकी गिरफ्तारी दर्ज की गई। इस कार्रवाई के बाद आंदोलन और उग्र हो गया।
धरना स्थल पर सिविल लाइंस से विधायक गोपाल शर्मा भी पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना। विधायक ने आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के समक्ष उठाएंगे और निष्पक्ष जांच कराने का प्रयास करेंगे।
हालांकि, पत्रकारों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, उन्हें ठोस कार्रवाई चाहिए।
इस धरने में राजस्थान के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में पत्रकार शामिल हुए। संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। यह प्रदर्शन अब केवल जयपुर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे प्रदेश में इसकी गूंज सुनाई दे रही है।
प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगली रणनीति संगठन की कोर कमेटी की बैठक में तय की जाएगी, जिसमें राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा बनाई जा सकती है।
पत्रकारों का कहना है कि यह लड़ाई केवल उनके अधिकारों की नहीं, बल्कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की भी है।
जयपुर में पत्रकारों का यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। पुलिस कार्रवाई और सरकार की चुप्पी के बीच पत्रकारों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह विरोध प्रदर्शन बड़े स्तर पर फैल सकता है और राज्य की राजनीति में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
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